Edited By Swati Sharma, Updated: 06 Sep, 2026 10:09 AM

हिमाचल प्रदेश में लगाई गई राजस्व लोक अदालतों और विशेष अदालतों ने राजस्व अभिलेखों में सुधार के 26,288 तथा दाखिल खारिज के करीब 5,44,000 मामलों का निस्तारण किया। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। इसके साथ ही इन अदालतों ने भूखंड में अंश तय करने के...
Shimla News : हिमाचल प्रदेश में लगाई गई राजस्व लोक अदालतों और विशेष अदालतों ने राजस्व अभिलेखों में सुधार के 26,288 तथा दाखिल खारिज के करीब 5,44,000 मामलों का निस्तारण किया। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। इसके साथ ही इन अदालतों ने भूखंड में अंश तय करने के 47,333 और 63,000 सीमांकन मामलों का निस्तारण किया।
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि अक्टूबर 2023 से, राजस्व से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए हर महीने के आखिरी दो दिन तहसील और उप-तहसील मुख्यालयों पर राजस्व लोक अदालतें आयोजित की जा रही हैं। भूखंड बंटवारे और राजस्व सुधार के मामलों को सुलझाने के लिए जनवरी 2026 से हर हफ्ते तीन दिन मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार को विशेष राजस्व लोक अदालतें आयोजित की जा रही हैं। प्रवक्ता ने कहा, ''इन अदालतों को लोगों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इससे उन्हें अपने लंबित राजस्व मामलों को तेजी से सुलझाने के लिए एक सुविधाजनक और प्रभावी मंच मिलता है।
राज्य सरकार की इस पहल से राजस्व मामलों के लंबित रहने की संख्या में काफी कमी आई है और यह सुनिश्चित हुआ है कि लोगों को राजस्व कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाए बिना समय पर राहत मिल सके।'' उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों के लोगों को इस पहल से लाभ हुआ है, क्योंकि जमीन से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए उन्हें बार-बार राजस्व कार्यालय जाने में काफी समय और पैसा खर्च करना पड़ता था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राजस्व मामले सीधे तौर पर परिवारों और भूमि स्वामियों के हितों से जुड़े हैं, इसलिए, उन्हें जल्द से जल्द सुलझाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इसका मकसद यह पक्का करना था कि लोगों को अपने उचित काम के लिए सरकारी दफ़्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।
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