विधानसभा : हिमाचल में सड़क से छेड़छाड़ करना पड़ेगा भारी, अब बिना नोटिस अतिक्रमण हटेंगे

Edited By Kuldeep, Updated: 02 Sep, 2026 09:27 PM

shimla himachal road molestation

प्रदेश में अब सड़कों को नुक्सान पहुंचाने, किनारे पर मलबा फैंकने, अवैध कब्जा करने या अपने खराब वाहनों को सड़क पर छोड़ने पर कार्रवाई होगी।

शिमला (कुलदीप): प्रदेश में अब सड़कों को नुक्सान पहुंचाने, किनारे पर मलबा फैंकने, अवैध कब्जा करने या अपने खराब वाहनों को सड़क पर छोड़ने पर कार्रवाई होगी। विधानसभा में इससे संबंधित हिमाचल प्रदेश सड़क अवसंरचना संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया है, जिसके लागू होने के बाद लोक निर्माण विभाग को अतिक्रमणकारियों पर नकेल कसने के लिए शक्तियां मिल जाएंगी। सड़क खोदने या नुक्सान पहुंचाने पर, बिना अनुमति सड़क काटने, पुलों या नालियों को तोड़ने पर, सड़क को वापस ठीक करने में आने वाले खर्च का 5 गुना जुर्माना वसूला जाएगा।

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार सड़क पर खोदी गई मिट्टी या मलबा फैंकने पर 1,000 रुपए प्रतिदिन (प्रति घन मीटर) और निर्माण सामग्री का ढेर लगाने पर 2,000 रुपए प्रतिदिन का जुर्माना देना होगा। अवैध विज्ञापन बोर्ड लगाने पर 500 रुपए प्रति रनिंग मीटर के हिसाब से रोज जुर्माना लगेगा। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने विधानसभा में पेश किए गए संशोधन विधेयक के बारे में कहा कि इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर राज्य की सड़कों को सुरक्षित, सुगम और अतिक्रमण मुक्त बनाना है। नए कानून के तहत अधिकारियों को बड़ी शक्तियां दी गई हैं।

कार्रवाई में बाधा डालने पर 2 साल तक की जेल होगी
इसके अलावा लोग अपने खराब या दुर्घटनाग्रस्त वाहनों और मशीनों को सड़क किनारे लावारिस छोड़ते हैं। इस स्थिति में भी वाहन मालिक पर 2,000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा। तय समय तक वाहन न ले जाने पर उसकी सार्वजनिक नीलामी तक कर दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति विभाग की कार्रवाई में बाधा डालता है, आदेशों का उल्लंघन करता है, या जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे 2 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों सजा हो सकती हैं। इसके अलावा अतिक्रमण हटाने के दौरान अधिकारी सीधे पुलिस से लिखित रूप में मदद मांग सकेंगे और पुलिस को यह सहायता तत्काल उपलब्ध करानी होगी।

दोषियों को जियो-टैगिंग से पकड़ा जाएगा
सड़क सीमाओं का निर्धारण सिर्फ पुराने कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। सड़कों के डिजिटल नक्शे बनेंगे, जिनमें नियंत्रण बिंदुओं को भू-निर्देशांक (जिओ-काॅर्डीनेट) से जोड़ा जाएगा। अवैध कब्जे या नुक्सान की जियो-टैग की गई फोटो साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल होगी, जिससे मौके से भागने के बाद भी दोषी बच नहीं पाएंगे।

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