Edited By Vijay, Updated: 29 Jul, 2026 07:52 PM

हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के दौरान खनिजों के दोहन से प्राप्त होने वाले राजस्व में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को राज्य सचिवालय में उद्योग विभाग के तहत खनन विंग के कार्यों की समीक्षा की।
शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के दौरान खनिजों के दोहन से प्राप्त होने वाले राजस्व में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को राज्य सचिवालय में उद्योग विभाग के तहत खनन विंग के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने राजस्व के आंकड़ों पर संतोष जताते हुए अवैध खनन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, प्रधान सचिव एम. सुधा देवी, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व जलवायु परिवर्तन सचिव डॉ. सुशील कुमार सिंगला, उद्योग निदेशक विवेक भाटिया, हिमकोस्ट के संयुक्त सदस्य सचिव डॉ. सुरेश चंद अत्री सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
खनन राजस्व 200 करोड़ से बढ़कर 340 करोड़ पहुंचा
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान आंकड़े सांझा करते हुए बताया कि राज्य में खनन गतिविधियों से होने वाली आय में भारी इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष 2021-22 में मुख्य और लघु खनिजों से प्रदेश को 200 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। वहीं, अब वर्ष 2025-26 के लिए यह आंकड़ा बढ़कर 340 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक कदम है।
पड़ोसी राज्यों द्वारा लगाए गए टैक्स पर जताई चिंता
राजस्व में वृद्धि के बावजूद, मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती राज्यों की नीतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड द्वारा हिमाचल से जाने वाले लघु खनिजों पर अतिरिक्त शुल्क लगा दिया गया है। इसके कारण प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से खनिजों के निर्यात में कमी आई है और राजस्व प्राप्ति प्रभावित हुई है। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस मामले को पड़ोसी राज्यों के साथ कानूनी और विधिवत तरीके से उठाया जाए।
केंद्र सरकार से उठाएंगे चूना पत्थर की रॉयल्टी का मुद्दा
मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्र सरकार की नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2014 से केंद्र सरकार ने चूना पत्थर की रॉयल्टी दरों में कोई संशोधन नहीं किया है। इस कारण राज्य के राजस्व पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल अपना वाजिब हक प्राप्त करने के लिए इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के साथ होगा वैज्ञानिक खनन
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ चलने चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्रदेश में खनिजों का दोहन वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से ही सुनिश्चित किया जाए। प्राकृतिक संसाधनों का दोहन केवल निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल की पारिस्थितिकी बेहद नाजुक है, इसलिए नदियों, नालों, वनों और प्राकृतिक धरोहरों को किसी भी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए।
अवैध खनन पर जीरो टॉलरैंस और निरंतर निगरानी के दिए निर्देश
अवैध खनन पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए। उन्होंने कहा कि खनन केवल सरकार द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में ही किया जाना चाहिए। संबंधित एजैंसियां नियमित रूप से निरीक्षण करें और गतिविधियों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करें, ताकि पर्यावरण को कोई नुक्सान न पहुंचे।
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