Edited By Kuldeep, Updated: 02 Sep, 2026 06:50 PM

वाहन चोरी होने के बाद बीमा दावा निपटाने में आनाकानी करना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया।
बिलासपुर (बंशीधर): वाहन चोरी होने के बाद बीमा दावा निपटाने में आनाकानी करना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले में बीमा कंपनी को ट्रक का 6 लाख 32 हजार 708 रुपए का बीमित घोषित मूल्य अदा करने के साथ वर्ष 2023 से क्लेम सैटलमैंट तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा शिकायतकर्त्ता को 40 हजार रुपए मुआवजा और 5 हजार रुपए न्यायालय का खर्च भी देना होगा।
अर्की निवासी राकेश कुमार ने अपने ट्रक का बीमा श्रीराम फाइनांस कंपनी से करवाया था। बीमा अवधि 11 मई 2016 से 10 मई 2017 तक थी। इसी दौरान 15 नवम्बर, 2016 को खारसी से ट्रक चोरी हो गया। वाहन चोरी होने के बाद राकेश कुमार ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन एफआईआर दर्ज न होने पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। न्यायालय के निर्देश के बाद वर्ष, 2019 में बरमाणा थाना में चोरी का मामला दर्ज किया गया।
शिकायतकर्त्ता का आरोप था कि ट्रक चोरी होने के बावजूद बीमा कंपनी ने उनके दावे का उचित तरीके से निपटारा नहीं किया। लंबे समय तक दावा लंबित रहने से उन्हें आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी। इससे पहले भी उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत की थी। आयोग ने 14 नवम्बर 2022 को 15 दिन के भीतर नया दावा प्रस्तुत करने और उसके बाद बीमा कंपनी को अगले 15 दिन में दावे का निपटारा करने के निर्देश दिए थे, लेकिन मामला फिर भी सुलझ नहीं सका।
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से पेश दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पुरेंद्र वैद्य तथा सदस्यों जगदीश ठाकुर और मंचली ने बीमा कंपनी को शिकायतकर्त्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने स्पष्ट किया कि वाहन का बीमित घोषित मूल्य 6,32,708 रुपए ही देय माना जाएगा।
आयोग के आदेश के अनुसार बीमा कंपनी को इस राशि पर वर्ष, 2023 से लेकर क्लेम सैटलमैंट की तारीख तक 6 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। साथ ही मानसिक एवं आर्थिक परेशानी के लिए 40 हजार रुपए तथा मुकद्दमेबाजी के खर्च के रूप में 5 हजार रुपए अलग से अदा करने होंगे। लंबे समय तक दावा लटकाने पर आयोग की सख्ती ने साफ कर दिया है कि वैध बीमा दावे को अनावश्यक रूप से लंबित रखना उपभोक्ता अधिकारों की अनदेखी माना जा सकता है।