Edited By Vijay, Updated: 09 Aug, 2026 07:12 PM

हिमाचल प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के मानदेय को लेकर एक अजीबोगरीब स्थिति और नया विवाद उत्पन्न हो गया है। सरकार की घोषणा और स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आदेशों में भारी विरोधाभास देखने को मिला है।
शिमला (संतोष): हिमाचल प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के मानदेय को लेकर एक अजीबोगरीब स्थिति और नया विवाद उत्पन्न हो गया है। सरकार की घोषणा और स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आदेशों में भारी विरोधाभास देखने को मिला है। एक ओर जहां राज्य सरकार ने विशेषज्ञ जॉब ट्रेनी मेडिकल अफसरों का मानदेय बढ़ाकर 60,000 रुपए करने का ऐलान किया है, वहीं दूसरी ओर सुपर-स्पेशलिटी (एमसीएच) की डिग्री हासिल करने वाले डॉक्टर को महज 34,000 रुपए मासिक मानदेय पर नियुक्त किया गया है।
गौरतलब है कि बीते 5 अगस्त को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने विशेषज्ञ जॉब ट्रेनी मेडिकल अफसरों के मानदेय में 78 प्रतिशत की भारी वृद्धि करते हुए इसे 33,660 रुपए से बढ़ाकर 60,000 रुपए करने की ऐतिहासिक घोषणा की थी, लेकिन इस घोषणा के ठीक दो दिन बाद 7 अगस्त को स्वास्थ्य विभाग ने एक नियुक्ति आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेजसे एमसीएच की उच्च शिक्षा पूरी करने वाले डॉ. कुणाल शर्मा को सुपर स्पैशलिटी अस्पताल चमियाणा में जॉब ट्रेनी के तौर पर तैनात किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस नियुक्ति में उनका मासिक मानदेय केवल 34,000 रुपए तय किया गया है।
क्या सुपर-स्पैशलिस्ट पर लागू नहीं होती नई दरें?
दोनों फैसलों के बीच 26,000 रुपए प्रतिमाह का सीधा अंतर है। इस विसंगति ने चिकित्सा जगत में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकार द्वारा बढ़ाई गई मानदेय की नई दरें सुपर-स्पैशलिस्ट डॉक्टरों पर लागू नहीं होती हैं? विशेषज्ञ से भी एक कदम आगे की पढ़ाई करने वाले सुपर-स्पैशलिस्ट (एमसीएच) डॉक्टर को कम मानदेय मिलना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है।
मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने जताई कड़ी आपत्ति
एक डॉक्टर को सुपर-स्पैशलिस्ट बनने के लिए लगभग 12 साल की लंबी और बेहद कठिन मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। इतनी उच्च योग्यता हासिल करने के बावजूद कम मानदेय दिए जाने पर हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। डॉक्टरों के संगठन का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकारी संस्थानों में इन उच्च योग्य विशेषज्ञों को प्रतिस्पर्धी और सम्मानजनक आर्थिक पैकेज नहीं दिया गया, तो वे मजबूरन निजी क्षेत्र या अन्य राज्यों का रुख कर लेंगे। यदि ऐसा होता है, तो चमियाणा जैसे प्रमुख सुपर-स्पेशलिटी संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को गहरा झटका लग सकता है। फिलहाल, इस पूरे मामले और मानदेय की इस भारी विसंगति पर अब स्वास्थ्य विभाग के स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें