Zila Parishad Election Result: ऊना में फिर खिला कमल, 17 में से 11 सीटों पर BJP का कब्जा; कांग्रेस 5 पर सिमटी

Edited By Vijay, Updated: 01 Jun, 2026 01:47 PM

zila parishad election result

जिला ऊना में एक बार फिर से जिला परिषद पर भाजपा ने कब्जा जमाया है। वर्ष 2021 के चुनावों में भी भाजपा समर्थित जिला परिषद बनी थी और 2026 में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने जिला परिषद के 17 में से 11 वार्डों पर कब्जा किया है जबकि एक अन्य बागी भी भाजपा...

ऊना (सुरेन्द्र): जिला ऊना में एक बार फिर से जिला परिषद पर भाजपा ने कब्जा जमाया है। वर्ष 2021 के चुनावों में भी भाजपा समर्थित जिला परिषद बनी थी और 2026 में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने जिला परिषद के 17 में से 11 वार्डों पर कब्जा किया है जबकि एक अन्य बागी भी भाजपा समर्थित है। कांग्रेस के खाते में केवल 5 सीटें ही गई हैं। देर रात तक नतीजों में मुबारिकपुर वार्ड से पवनजीत, कुठेड़ा खैरला से अरूणलता, सोहारी से योगराज योगी, लठियाणी से अनीता देवी, चताड़ा से अनु ठाकुर, देहलां अप्पर से अविनाश मैनन, रायपुर सहोड़ा से बिंदु शर्मा, पंजावर से इंदु बाला, अम्बोटा से पवन नम्बरदार, चलेट से आरती देवी और भंजाल लोअर से गुरमुख सिंह विजयी हुए हैं जोकि भाजपा समर्थित हैं। कुटलैहड़ के धनेत से चंचला देवी जीती हैं जोकि पूर्व मंत्री वीरेन्द्र कंवर समर्थित हैं। कांग्रेस समर्थितों में ठठल से सरवण सिंह, टक्का से सुमित शर्मा, बाथु से ज्योति बाला, दुलैहड़ से सुलिन्द्र पाल कौर और हरोली से केवल सिंह शामिल हैं। जिला परिषद के नतीजों के बाद अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थितों का कब्जा अब तय माना जा रहा है। 

कांग्रेस पार्टी को ऊना, कुटलैहड़, गगरेट और चिंतपूर्णी में निराशा मिली है जबकि उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री के हरोली क्षेत्र में एक सीट को छोडक़र बाकी पर शानदार विजय मिली है। अग्रिहोत्री का जिला परिषद से लेकर ग्राम पंचायतों में भी दबदबा रहा है और उनके कई समर्थित चुनाव जीतने में सफल हुए हैं। कांग्रेस पार्टी को सबसे अधिक निराशा ऊना विधानसभा क्षेत्र में मिली है। यहां कांग्रेस समर्थित एक भी चेहरा जीत नहीं पाया है। आपसी समन्वय की कमी और कुशल रणनीति के अभाव में यहां भाजपा ने बाजी मारी है। ऊना के विधायक सतपाल सिंह सत्ती की रणनीति यहां कामयाब हुई है। पार्टी ने आपसी तालमेल और प्रचार में ताकत झोंकने के चलते सभी सीटों पर विजय हासिल की है।

कुटलैहड़ की बात करें तो यहां कांग्रेस और भाजपा के बीच आपसी खटपट रही है। हालांकि यहां के तीनों नेताओं में विधायक विवेक शर्मा विक्कू, भाजपा के पूर्व मंत्री वीरेन्द्र कंवर, पूर्व विधायक देवेन्द्र भुट्टो को एक-एक सीट मिली है। कुटलैहड़ ने तीनों के साथ न्याय किया है। यहां जिला कांग्रेस अध्यक्ष देसराज गौतम के पुत्र शोभित गौतम काफी कम अंतर से चुनाव हारे हैं। चिंतपूर्णी क्षेत्र में विधायक सुदर्शन बबलू को भी तगड़ा झटका लगा है। उन्हें अपने गृहक्षेत्र ठठल से ही महज सफलता मिली है जबकि बाकी सभी सीटों पर भाजपा समर्थितों ने बाजी मारी है। सबसे बड़ा झटका सोहारी और कुठेड़ा खैरला वार्ड में लगा है। जहां तमाम प्रचार तंत्र झोकनें और गृहपंचायत होने के बावजूद भी हार का सामना करना पड़ा है।

गगरेट विधानसभा क्षेत्र में हालांकि भाजपा के भीतर काफी खटपट थी, लेकिन इसके बावजूद पार्टी समर्थितों का जिला परिषद पर दबदबा रहा। विधायक राकेश कालिया के समर्थितों को बड़ा झटका मिला है। कालिया के अपने गृहक्षेत्र लोअर भंजाल से भी भाजपा समर्थित को जीत मिली है जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को हार मिली है। कुल मिलाकर कांग्रेस के लिए यह चुनाव एक बड़ा संकेत है। दूसरी बार हुआ है जब जिला परिषद में पार्टी को निराशा मिली है। ग्राम पंचायतों में भी अधिकतर प्रत्याशी भाजपा समर्थित की विजयी हुए हैं और ऐसे में कांग्रेस को अपनी रणनीति में फेरबदल करने की जरूरत है।

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