Himachal :  गाय के पेट से निकला सात किलो प्लास्टिक-पत्थर और सिक्के, डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान

Edited By Swati Sharma, Updated: 11 Jun, 2026 06:38 PM

una  plastic found in cow stomach

Una News : पशु चिकित्सा विभाग की तत्परता, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कुशलता के चलते तहसील अम्ब के सोहारी गांव की एक गाय को नया जीवनदान मिला। बहुआयामी पशु चिकित्सालय एवं पशु चिकित्सा पॉलीक्लीनिक ललड़ी में किए गए सफल ऑपरेशन के...

Una News : पशु चिकित्सा विभाग की तत्परता, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कुशलता के चलते तहसील अम्ब के सोहारी गांव की एक गाय को नया जीवनदान मिला। बहुआयामी पशु चिकित्सालय एवं पशु चिकित्सा पॉलीक्लीनिक ललड़ी में किए गए सफल ऑपरेशन के दौरान गाय के पेट से लगभग 7 किलोग्राम प्लास्टिक, दो पत्थर तथा तीन सिक्के निकाले गए।

डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान

इस जटिल शल्य चिकित्सा को डॉ. निशांत रनौत के नेतृत्व में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। ऑपरेशन टीम में डॉ. नवनीत शर्मा, डॉ. शिल्पा, फार्मासिस्ट सौरव कुमार तथा रीमा, सनंदा, राम प्रसाद, दीपक, सक्षम और विकास ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. निशांत रनौत ने बताया कि गाय पिछले रविवार से चारा नहीं खा रही थी और लगातार बेचैनी व तनाव की स्थिति में थी। पशु की गंभीर हालत को देखते हुए उसे उपचार के लिए ललड़ी पॉलीक्लीनिक लाया गया। जांच के दौरान चिकित्सकों को पेट में बाहरी वस्तुओं के जमा होने की आशंका हुई, जिसके बाद तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि शल्य चिकित्सा के दौरान गाय के पेट से भारी मात्रा में प्लास्टिक, दो पत्थर और तीन सिक्के निकाले गए। लंबे समय से पेट में जमा यह सामग्री पशु के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी थी। समय पर किए गए उपचार और सफल ऑपरेशन के कारण गाय की जान बच गई तथा उसकी स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया  कि खुले में फेंका गया प्लास्टिक न केवल पर्यावरण बल्कि पशुधन के लिए भी गंभीर खतरा है। पशु चिकित्सा विभाग ने लोगों से अपील की है कि प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करें ताकि पशुओं को इस प्रकार के जोखिमों से बचाया जा सके। सोहारी गांव के पशुपालक मदन लाल ने पशु चिकित्सा विभाग और चिकित्सकों की टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी गाय की हालत बेहद गंभीर थी, लेकिन ललड़ी पशु चिकित्सालय में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में सफल ऑपरेशन होने से उसे नया जीवन मिला है। उन्होंने कहा कि बहुआयामी पशु चिकित्सालय एवं पॉलीक्लीनिक ललड़ी क्षेत्र के पशुपालकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यहां उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ सेवाओं के कारण अब पशुपालकों को अपने पशुओं के उपचार के लिए दूर-दराज के बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ता।

पशुपालकों के लिए वरदान बन रहा बहुआयामी पशु चिकित्सालय ललड़ी

बहुआयामी पशु चिकित्सालय ललड़ी आज ऊना जिले ही नहीं, बल्कि आसपास के पंजाब क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए भी एक भरोसेमंद स्वास्थ्य केंद्र बनकर उभरा है। यहां इकोकार्डियोग्राफी, इलास्टोग्राफी, अल्ट्रासाउंड, ऑर्थोपेडिक सर्जरी, नेत्र शल्य चिकित्सा, कार्डियक एवं थोरेसिक सर्जरी, सीज़ेरियन ऑपरेशन सहित अनेक अत्याधुनिक पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्नत चिकित्सा सेवाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों के कारण यह संस्थान क्षेत्र में “पीजीआई ऑफ एनिमल्स” के नाम से लोकप्रिय होता जा रहा है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के प्रयासों से यहां लगभग 16 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित की गई है। इस मशीन की सहायता से अब तक लगभग 1000 पशुओं का सटीक निदान एवं सफल उपचार किया जा चुका है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक और समय दोनों स्तरों पर बड़ी राहत मिली है। पहले जहां पशुओं के विशेष उपचार के लिए लुधियाना जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, वहीं अब अधिकांश सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हैं।

उपमुख्यमंत्री के प्रयासों से पशु चिकित्सा सेवाओं को मिली नई दिशा

उल्लेखनीय है कि बहुआयामी पशु चिकित्सालय ललड़ी की स्थापना और इसके निरंतर आधुनिकीकरण में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में संस्थान में आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ स्टाफ की नियुक्ति सुनिश्चित की गई है, जिससे पशुपालकों को उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं मिल रही हैं। इसी क्रम में उपमुख्यमंत्री के प्रयासों से हरोली पशु चिकित्सालय को स्तरोन्नत कर उप-मंडलीय पशु चिकित्सालय (सब-डिविजनल वेटरिनरी हॉस्पिटल) का दर्जा प्रदान किया गया है। इससे हरोली एवं आसपास के क्षेत्रों के पशुपालकों को विशेषज्ञ पशु चिकित्सा सेवाएं, बेहतर उपचार, टीकाकरण, रोग नियंत्रण तथा अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं अपने क्षेत्र में ही उपलब्ध हो सकेंगी। यह कदम क्षेत्र में पशुपालन गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाने तथा पशुपालकों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।

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