Sirmour: हिमाचल में पहली बार गूंजी रॉयल बंगाल टाइगर की दहाड़, नागपुर से रेणुका जी पहुंचा जोड़ा

Edited By Kuldeep, Updated: 20 Sep, 2026 07:45 PM

shri renuka ji tiger

हिमाचल प्रदेश के वन्यजीव इतिहास में रविवार का दिन खास बन गया। पहली बार प्रदेश के किसी चिड़ियाघर में रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा पहुंचा है।

नाहन/श्री रेणुका जी (आशु): हिमाचल प्रदेश के वन्यजीव इतिहास में रविवार का दिन खास बन गया। पहली बार प्रदेश के किसी चिड़ियाघर में रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा पहुंचा है। महाराष्ट्र के नागपुर स्थित बालासाहेब ठाकरे गोरेवाड़ा अंतर्राष्ट्रीय प्राणी उद्यान से टाइगर का नर-मादा जोड़ा करीब 1900 किलोमीटर का सफर तय कर श्री रेणुका जी पहुंच गया। जोड़े में मादा टाइगर की उम्र 3 वर्ष और नर की उम्र 5 वर्ष है। दोनों को विशेष सुरक्षा इंतजामों के साथ नागपुर से श्री रेणुका जी लाया गया। टाइगरों के इस जोड़े के पहुंचने के साथ ही रेणुका जी की सफारी के इतिहास में भी एक नया अध्याय जुड़ गया है।

शुक्रवार शाम नागपुर से निकले, रविवार को रेणुका जी पहुंचे
टाइगर का जोड़ा शुक्रवार शाम करीब 6 बजे महाराष्ट्र के नागपुर स्थित गोरेवाड़ा से श्री रेणुका जी के लिए रवाना हुआ था। सफर में वन्य प्राणी विंग शिमला डिवीजन के डी.एफ.ओ. डॉ. शाहनवाज अहमद के नेतृत्व में 8 सदस्यीय टीम लगातार टाइगरों के साथ रही। रॉयल बंगाल टाइगर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत शैड्यूल-वन श्रेणी में आता है। ऐसे में इनके परिवहन के दौरान नैशनल जू अथॉरिटी के निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किया गया। दोनों टाइगरों को विशेष रूप से तैयार खुले ट्रक में लाया गया। पूरे सफर के दौरान उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी गई।

रेणुका जी में टाइगरों के पहुंचने से पहले ही उनके लिए आधुनिक एनक्लोजर तैयार किया जा चुका है। करीब 1.67 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस एनक्लोजर का क्षेत्रफल लगभग 4500 वर्ग मीटर है। एनक्लोजर में टाइगरों के लिए खुला क्षेत्र, नाइट शैल्टर, नर्सिंग और उनकी जरूरतों के मुताबिक अन्य सुविधाएं विकसित की गई हैं।

सुरक्षा मानकों के तहत लाया गया जोड़ा : डीएफओ
वन्य प्राणी विंग शिमला डिवीजन के डीएफओ डॉ. शाहनवाज अहमद ने बताया कि टाइगर के जोड़े को निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत नागपुर से श्री रेणुका जी लाया गया है। परिवहन के दौरान नैशनल जू अथॉरिटी के दिशा-निर्देशों का विशेष ध्यान रखा गया है। अब आगे की प्रक्रिया के तहत दोनों टाइगरों को निर्धारित एनक्लोजर में रखा जाएगा।

1975 में आए थे शेर, कभी 29 तक पहुंची थी संख्या
रेणुका जी की सफारी का इतिहास शेरों की दहाड़ से भी जुड़ा रहा है। वर्ष 1975 में जूनागढ़ से यहां शेरों का एक जोड़ा लाया गया था। इसके बाद इनकी संख्या बढ़ती गई और एक समय सफारी में करीब 29 शेर और शेरनियां मौजूद थीं। समय के साथ शेरों में इनब्रीडिंग और आनुवंशिक समस्याएं सामने आईं। धीरे-धीरे इनकी संख्या कम होती गई और वर्ष 2015 में यहां मौजूद आखिरी शेर की मौत हो गई।

सिरमौर के जंगलों में कैमरा ट्रैप में दर्ज हो चुकी मौजूदगी
श्री रेणुका जी में टाइगर का जोड़ा ऐसे समय पहुंचा है, जब सिरमौर के जंगलों में भी टाइगर की मौजूदगी दर्ज हो चुकी है। फरवरी 2023 में सिम्बलबाड़ा नैशनल पार्क क्षेत्र में कैमरा ट्रैप के जरिए जंगली टाइगर की तस्वीर सामने आई थी। इसके बाद वर्ष 2026 में पांवटा साहिब के खारा क्षेत्र में भी कैमरा ट्रैप के जरिए टाइगर की मौजूदगी दर्ज होने की जानकारी सामने आई।

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