हिमाचल में गवाहों को अब मिलेगा फुलप्रूफ सुरक्षा कवच

Edited By Kuldeep, Updated: 02 Nov, 2026 09:59 PM

shimla witness protective shield

प्रदेश में आपराधिक मामलों की जांच और सुनवाई के दौरान गवाहों को धमकाने, डराने और उन पर दबाव बनाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

शिमला (ब्यूरो): प्रदेश में आपराधिक मामलों की जांच और सुनवाई के दौरान गवाहों को धमकाने, डराने और उन पर दबाव बनाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हिमाचल प्रदेश साक्षी संरक्षण स्कीम, 2026 अधिसूचित की है। इसके तहत गवाहों और उनके परिवार के सदस्यों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ जरूरत पड़ने पर उनकी पहचान बदलने और दूसरे स्थान पर बसाने तक की व्यवस्था की जाएगी।

गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह योजना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 398 के तहत बनाई गई है। राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद अब यह योजना लागू मानी जाएगी। योजना के तहत प्रत्येक जिले में एक सक्षम प्राधिकारी समिति गठित की जाएगी। गवाह की ओर से सुरक्षा के लिए आवेदन मिलने पर समिति मामले की गंभीरता और खतरे की स्थिति का आकलन करेगी। इसके अलावा अदालत में पेशी के दौरान सरकारी वाहन या राज्य सरकार की ओर से वित्तपोषित परिवहन सुविधा, सुरक्षा एस्कॉर्ट और बंद कमरे में सुनवाई की व्यवस्था भी की जा सकती है।

गवाह और आरोपी का आमना-सामना न हो, इसके लिए विशेष अदालत कक्ष, लाइव वीडियो लिंक, अलग रास्ते और जरूरत के अनुसार चेहरे तथा आवाज को छिपाने की तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा सकेगा। गवाह संरक्षण से जुड़े आवेदनों की सुनवाई बंद कमरे में होगी और पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा जाएगा। सुरक्षा आदेश लागू होने के बाद गवाह संरक्षण प्रकोष्ठ सक्षम प्राधिकारी के समक्ष हर महीने अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। समिति सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी करेगी।

योजना के तहत राज्य गवाह संरक्षण निधि गठित करने का प्रावधान किया गया है। इस निधि से गवाहों की सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले खर्च और पुनर्वास संबंधी जरूरतों को पूरा किया जाएगा। योजना में यह भी प्रावधान है कि यदि कोई गवाह झूठी शिकायत दर्ज करवाता है तो उस पर किए गए खर्च की वसूली की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, सक्षम प्राधिकारी के फैसले से असंतुष्ट गवाह या पुलिस अधिकारी 15 दिनों के भीतर गृह विभाग के समक्ष पुनर्विचार आवेदन कर सकेंगे।

5 कार्य दिवस में तैयार होगी धमकी की रिपोर्ट
गवाह की सुरक्षा के लिए आवेदन मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक या संबंधित उप पुलिस अधीक्षक से धमकी विश्लेषण रिपोर्ट मांगी जाएगी। पुलिस को यह रिपोर्ट 5 कार्य दिवस के भीतर सक्षम प्राधिकारी तक पहुंचानी होगी। रिपोर्ट मिलने के बाद समिति भी पांच कार्य दिवस में आवेदन पर निर्णय लेगी।

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