Shimla: बेसहारा गौवंश के संरक्षण के लिए सुक्खू सरकार ने खोले खजाने, 14.68 करोड़ रुपए जारी

Edited By Kuldeep, Updated: 05 Apr, 2026 06:24 PM

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राज्य की सुक्खू सरकार ने राज्य में बेसहारा गौवंश की समस्या के समाधान और किसानों की फसलों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।

शिमला (संतोष): राज्य की सुक्खू सरकार ने राज्य में बेसहारा गौवंश की समस्या के समाधान और किसानों की फसलों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान गोपाल योजना के अंतर्गत 14.68 करोड़ की राशि वितरित की गई है। इस बजट का मुख्य उद्देश्य सड़कों और खेतों में बेसहारा घूम रहे गौवंश को उचित आश्रय और पौष्टिक आहार सुनिश्चित करना है। राज्य में बेसहारा पशुओं के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ रहा था। कई क्षेत्रों में बेसहारा पशुओं के डर से किसानों ने खेती करना तक छोड़ दिया था।

सरकार के इस कदम से न केवल फसलों की बर्बादी रुकेगी, बल्कि किसान दोबारा खेती की ओर प्रेरित होंगे। इसके अलावा सड़कों पर बेसहारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी, जिससे सड़क सुरक्षा में सुधार होगा। पंजीकृत गऊशालाओं और अभ्यारण्यों को मजबूती देने के लिए सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके तहत गऊशालाओं को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को 700 रुपए से बढ़ाकर 1,200 रुपए प्रति गाय कर दिया गया है। बढ़ी हुई यह दरें 1 अक्तूबर, 2025 से प्रभावी हो चुकी हैं। यह सहायता राशि हिमाचल प्रदेश गौ सेवा आयोग के माध्यम से सीधे पात्र संस्थानों तक पहुंचाई जा रही है।

सरकार ने केवल वर्तमान ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी खाका तैयार किया है। बजट 2026-27 में बेसहारा गौवंश के पुनर्वास के लिए कई नए प्रावधान किए गए हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में नए गौ अभ्यारण्य और विशाल गौसदन बनाए गए हैं। प्रतिष्ठित एनजीओ और उद्योग समूहों को सरकारी गौसदनों को गोद लेने की अनुमति दी जाएगी, ताकि उनका प्रबंधन और बेहतर हो सके। आरडीजी बंद होने के बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों और बागवानों के हितों के लिए धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमने बेसहारा गौवंश के संरक्षण के लिए अनुदान राशि में उल्लेखनीय वृद्धि की है, ताकि गौमाता की सेवा के साथ-साथ हमारे किसानों की फसलों की भी रक्षा हो सके। बजट में किए गए नए प्रावधानों से हम प्रदेश को बेसहारा पशु मुक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। संसाधनों की सीमाओं के बावजूद किसानों और बागवानों को दी जाने वाली सहायता में कोई कटौती नहीं की जाएगी।

 

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