Shimla: अब थानों में लंबे समय तक नहीं पड़ी रहेंगी लावारिस और जब्त संपत्तियां, नई SOP जारी

Edited By Kuldeep, Updated: 13 May, 2026 06:44 PM

shimla police station seized property unclaimed

हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग ने थानों में लंबित पड़ी लावारिस और जब्त संपत्तियों के निपटान को लेकर बड़ा प्रशासनिक सुधार लागू किया है।

शिमला (राक्टा): हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग ने थानों में लंबित पड़ी लावारिस और जब्त संपत्तियों के निपटान को लेकर बड़ा प्रशासनिक सुधार लागू किया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी नई स्टैंडर्ड ऑप्रेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के तहत अब थानों में पड़े हर सामान की डिजिटल मॉनीटरिंग होगी और तय समय सीमा में उसका निपटान करना अनिवार्य रहेगा। इस नई व्यवस्था को पुलिस विभाग में पारदर्शिता, जवाबदेही और आधुनिक रिकॉर्ड प्रबंधन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। प्रदेश के कई पुलिस थानों में लंबे समय से जब्त वाहन, लावारिस सामान और पुराने मामलों से जुड़ीं वस्तुएं मालखानों में पड़ी रहती थीं। इससे थानों में जगह की कमी के साथ रिकॉर्ड प्रबंधन में भी दिक्कत आती थी। ऐसे में अब नई एसओपी के लागू होने के बाद ऐसी संपत्तियों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा सकेगा।

नई व्यवस्था के अनुसार किसी भी लावारिस वस्तु या जब्त संपत्ति को पुलिस कब्जे में लेते ही उसकी एंट्री रजिस्टर और सीसीटीएनएस पोर्टल पर करनी होगी। साथ ही वस्तु की फोटो, पहचान संबंधी विवरण और अन्य जरूरी जानकारी भी डिजिटल रूप से सुरक्षित रखी जाएगी। इससे सामान के गायब होने, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या बदलाव की संभावना नहीं रहेगी। यदि कोई वस्तु चोरी, अपराध या किसी संदिग्ध गतिविधि से जुड़ी पाई जाती है तो संबंधित मामले में एफआईआर या डीडीआर दर्ज करना भी अनिवार्य होगा। इसके अलावा जब्ती मेमो और पंचनामा तैयार करना जरूरी रहेगा। खराब होने वाली वस्तुओं को 48 घंटे के भीतर एसडीपीओ या एसपी की अनुमति से निस्तारण किया जा सकेगा, जबकि सामान्य लावारिस संपत्ति के लिए 15 दिन की सार्वजनिक नोटिस अवधि निर्धारित की गई है।

वहीं थानों में लंबे समय से खड़े लावारिस वाहनों को 90 दिनों के भीतर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर हटाया जाएगा। एसओपी में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा देरी, लापरवाही या नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों के थानों में इन निर्देशों को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए गए हैं। नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने से चोरी या खोई हुई वस्तुओं की पहचान और ट्रैकिंग आसान होगी। अदालतों में लंबित मामलों से जुड़ीं संपत्तियों का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा।

15 दिनों का सार्वजनिक नोटिस
नई एसओपी के तहत लावारिस संपत्ति के दावेदारों को सामने आने का अवसर देने के लिए संबंधित थाने द्वारा 15 दिनों का सार्वजनिक नोटिस जारी किया जाएगा। अधिक मूल्य वाली संपत्तियों की जानकारी स्थानीय समाचार पत्रों में भी प्रकाशित की जाएगी। यदि तय अवधि तक कोई दावा पेश नहीं किया जाता है तो एसडीपीओ या एसपी की मंजूरी के बाद संपत्ति के निपटान की प्रक्रिया शुरू होगी। साथ ही मामले की रिपोर्ट संबंधित न्यायिक मैजिस्ट्रेट को भी भेजी जाएगी।

हर जिले में बनेगी डिस्पोजल कमेटी
संपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक जिले में एसपी की अध्यक्षता में विशेष डिस्पोजल कमेटी गठित की जाएगी। इसमें पुलिस अधिकारियों के साथ प्रशासनिक अधिकारी और संबंधित एसएचओ को भी शामिल किया जाएगा। यह कमेटी नीलामी, नष्ट करने और अन्य प्रक्रियाओं की निगरानी करेगी, ताकि किसी तरह की अनियमितता की गुंजाइश न रहे। नीलामी से मिलने वाली राशि को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सरकारी खजाने में जमा करवाया जाएगा।

हर महीने होगी समीक्षा और रिपोर्टिंग
नई व्यवस्था के तहत अब लावारिस और निपटाई गईं संपत्तियों की हर महीने समीक्षा होगी। आईजी द्वारा रेंज स्तर पर इसकी मॉनीटरिंग की जाएगी और प्रत्येक माह की 7 तारीख तक विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेजना अनिवार्य रहेगा। इसके अलावा मालखाला रिकॉर्ड और सीसीटीएनएस डाटा का समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाएगा।

हथियार और ड्रग्स के मामलों में लागू होंगे अलग नियम
मादक पदार्थ, हथियार, विस्फोटक और नकली मुद्रा जैसी संवेदनशील वस्तुओं के निस्तारण के लिए संबंधित विशेष कानूनों और विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। इनमें एनडीपीएस एक्ट और एक्सप्लोसिव एक्ट के प्रावधान लागू होंगे

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