Edited By Vijay, Updated: 02 Sep, 2026 05:00 PM

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से लॉटरी व्यवस्था शुरू करने के फैसले पर सियासत गरमा गई है। बुधवार को इस फैसले के विरोध में भाजपा विधायकों ने विधानसभा के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।
शिमला (संतोष): हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से लॉटरी व्यवस्था शुरू करने के फैसले पर सियासत गरमा गई है। बुधवार को इस फैसले के विरोध में भाजपा विधायकों ने विधानसभा के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। मुख्य विपक्षी दल ने इस कदम को प्रदेश की युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए बेहद घातक करार देते हुए सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग उठाई है।
नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने लॉटरी शुरू करने के फैसले पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि देवभूमि हिमाचल के लोग हमेशा से ऐसी प्रवृत्तियों से दूर रहे हैं। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि आर्थिक तंगी की आड़ में प्रदेश सरकार ने पहले जनता पर नए कर (टैक्स) थोपे और अब राजस्व बढ़ाने के नाम पर लॉटरी शुरू कर रही है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि प्रदेश पहले ही चिट्टे जैसे खतरनाक सिंथैटिक नशे की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, ऐसे में लॉटरी युवाओं में एक नई लत को बढ़ावा देगी, जो समाज के लिए विनाशकारी साबित होगी।
मुख्यमंत्री के उस बयान पर भी नेता प्रतिपक्ष ने तीखा प्रहार किया जिसमें लॉटरी को केवल भाग्य का खेल बताया गया था। जयराम ठाकुर ने इसे एक बड़ा मजाक करार देते हुए कहा कि अतीत में लॉटरी के कारण कई परिवार पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं और लोगों को अपने घर व जमीन तक बेचने पर मजबूर होना पड़ा था। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जहां युवाओं को उनकी मेहनत का फल मिले, न कि ऐसी कोई नीति हो जिसमें हजारों लोगों की गाढ़ी कमाई किसी एक व्यक्ति के भाग्य के नाम पर लुट जाए।
लॉटरी के अलावा, भाजपा ने भांग की खेती को वैध करने के प्रस्ताव और बेरोजगारी के मुद्दे पर भी सुक्खू सरकार को विफल बताया। जयराम ठाकुर ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले अपनी पहली ही कैबिनेट में एक लाख नौकरियां देने का वादा किया था, जो पूरी तरह झूठा साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश का युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है और विभिन्न विभागों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लगातार सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
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