Edited By Swati Sharma, Updated: 19 Sep, 2026 05:06 PM

हिमाचल प्रदेश में सुंदरनगर के विधायक राकेश जामवाल ने शनिवार को सरकार पर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण चाम्याणा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में हृदय रोग से संबंधित दो...
Himachal Politics : हिमाचल प्रदेश में सुंदरनगर के विधायक राकेश जामवाल ने शनिवार को सरकार पर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण चाम्याणा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में हृदय रोग से संबंधित दो महत्वपूर्ण जांच बंद हो गई हैं।
जामवाल ने कहा कि हृदय रोगियों की लंबे समय तक निगरानी के लिए महत्वपूर्ण होल्टर निगरानी और एम्बुलेटरी रक्तचाप निगरानी (एबीपीएम) की सुविधा प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण अस्पताल में कथित तौर पर उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब मरीजों को इन जांच सेवाओं की आवश्यकता है तो पर्याप्त स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति क्यों नहीं की गयी। उन्होंने कहा, 'एक ओर सरकार सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों और नयी स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर उन्नत स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित अस्पताल में हृदय रोगियों की आवश्यक जांच बंद हो गयी है।' जामवाल ने आरोप लगाया कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, टांडा में भी मरीजों को सुई, सिरिंज, दस्ताने और दवाओं सहित आवश्यक चिकित्सा सामग्री प्राप्त करने में परेशानी हो रही है। उन्होंने हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजनाओं के तहत करीब 85 करोड़ रुपए के भुगतान लंबित होने की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि भुगतान में देरी से टांडा में दवाओं और चिकित्सा सामग्री की खरीद प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि अस्पताल केवल इमारतों से संचालित नहीं हो सकते, बल्कि इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग और तकनीकी कर्मचारियों, दवाओं, उपकरणों तथा समय पर भुगतान की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने सवाल किया, 'मौजूदा संस्थानों से डॉक्टरों और कर्मचारियों को पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था किए बिना दूसरे संस्थानों में क्यों स्थानांतरित किया जा रहा है?'
जामवाल ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनिराम शांडिल के उपचार की लागत और कथित तौर पर अधिक शुल्क वसूले जाने संबंधी बयान पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'यदि स्वास्थ्य मंत्री स्वयं कह रहे हैं कि दो लाख रुपए की लागत वाले उपचार के लिए चार लाख रुपये वसूले जा रहे हैं, तो कारर्वाई क्यों नहीं की गयी?' उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि टांडा में दवाओं और चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता क्यों प्रभावित हुई है, हिमकेयर के भुगतान लंबित क्यों हैं और मरीजों को कथित तौर पर आवश्यक सामान बाजार से खरीदने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है।
विधायक ने 18 सितंबर को हिमकेयर व्यवस्था में घोषित बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि मरीजों को उपचार प्राप्त करने में किसी तरह की परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करने की सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ गयी है। उन्होंने कहा कि नादौन और हमीरपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार स्वागत योग्य है, लेकिन इसकी कीमत टांडा, आईजीएमसी शिमला, चाम्याणा नेरचौक जैसे स्थापित संस्थानों को कमजोर करके नहीं चुकाई जानी चाहिए। जामवाल ने सरकार से नयी सुविधाओं की घोषणा करने से पहले मौजूदा प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों की कमियों को दूर करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'नई इमारतें और घोषणाएं बाद में हो सकती हैं, लेकिन मरीजों को आज उपचार की आवश्यकता है।'
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