Edited By Kuldeep, Updated: 22 Oct, 2026 10:30 PM

डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं अस्पताल टांडा ने एक माह के भीतर दो सफल किडनी ट्रांसप्लांट कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
पति ने पत्नी और बड़ी बहन ने छोटी बहन को किडनी दान कर दी नई जिंदगी
कांगड़ा (किशोर): डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं अस्पताल टांडा ने एक माह के भीतर दो सफल किडनी ट्रांसप्लांट कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इन दोनों प्रत्यारोपणों के साथ संस्थान में अब तक सफल किडनी ट्रांसप्लांट की संख्या 29 हो गई है। खास बात यह रही कि एक मामले में पति ने अपनी पत्नी को, जबकि दूसरे मामले में चम्बा जिले की एक बड़ी बहन ने अपनी छोटी बहन को किडनी दान की। संस्थान के प्रधानाचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने बताया कि पहले मामले में महिला ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित थी और नेफ्रोलॉजी विभाग में उसका उपचार चल रहा था।
बीमारी बढ़ने से उसकी किडनी ने काम करना बंद कर दिया, जिसके बाद प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ी। ऐसे कठिन समय में महिला के पति ने किडनी दान कर उसे नया जीवन देने की पहल की। मरीज की बेटी, जो स्वयं डॉक्टर है, ने भी ट्रांसप्लांट टीम के साथ समन्वय किया। दूसरे मामले में चम्बा जिले की एक महिला की किडनी की बीमारी गंभीर होकर रीनल फेलियर तक पहुंच गई थी और उसे हीमोडायलिसिस करवाना पड़ रहा था। इस मुश्किल घड़ी में उसकी बड़ी बहन ने किडनी दान करने का निर्णय लिया, जिससे छोटी बहन के प्रत्यारोपण का रास्ता खुला। इस दौरान परिवार को स्थानीय सामाजिक संगठनों से भी सहयोग मिला।
दोनों ट्रांसप्लांट प्रधानाचार्य डॉ. मिलाप शर्मा के मार्गदर्शन में रीनल ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अमित शर्मा, नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अभिनव राणा और सर्जरी, एनैस्थीसिया, नर्सिंग तथा अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त टीम ने सफलतापूर्वक किए। डॉ. मिलाप शर्मा ने कहा कि प्रदेश में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम होगी। उन्होंने कहा कि टांडा अस्पताल का यह कार्यक्रम हिमाचल के मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।