Kangra: न्यूगल खड्ड में फिर जहरीला पदार्थ डालकर मार दीं सैंकड़ों मछलियां, सैंपल रिपोर्ट आने तक पेयजल स्कीमें बंद

Edited By Vijay, Updated: 04 Jun, 2026 11:42 AM

hundreds of fish were killed again by putting poisonous substance in khadd

कांगड़ा जिले के पालमपुर उपमंडल के अंतर्गत आने वाली परौर में न्यूगल खड्ड में एक बार फिर जहरीला पदार्थ डालकर मछलियां मार डालीं। बुधवार को अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा खड्ड के पानी में जहरीली दवा डाली गई, जिसके चलते सैंकड़ों की संख्या में मछलियां तड़प-तड़प...

परौर/धीरा: कांगड़ा जिले के पालमपुर उपमंडल के अंतर्गत आने वाली परौर में न्यूगल खड्ड में एक बार फिर जहरीला पदार्थ डालकर मछलियां मार डालीं। बुधवार को अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा खड्ड के पानी में जहरीली दवा डाली गई, जिसके चलते सैंकड़ों की संख्या में मछलियां तड़प-तड़प कर मर गईं।  ​घटना का खुलासा तब हुआ जब स्थानीय ग्रामीणों ने न्यूगल खड्ड के ऊपर चील और कौवों के झुंड को मंडराते देखे। खड्ड के पास पक्षियों की भारी भीड़ देखकर लोगों को किसी अनहोनी का संदेह हुआ। जब कुछ ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो देखा कि पानी की सतह पर सैंकड़ों मृत मछलियां तैर रही थीं, जिन्हें खाने के लिए पक्षी वहां जमा हुए थे। 

पानी में तीखे जहर के कारण जलीय जीवन पूरी तरह नष्ट हो चुका था। ग्रामीणों का कहना है कि पानी में जहर मिलाने की इस घटना ने न केवल जलीय जीवों का संहार किया है, बल्कि आम जनमानस के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। स्थानीय निवासियों ने  दोषियों को जल्द से जल्द ढूंढकर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उधर जल शक्ति विभाग थुरल के अधिशासी अभियंता संदीप चौधरी ने बताया कि विभाग ने घटना के बाद तुरंत प्रभाव से न्यूगल नदी पर स्थापित सभी पेयजल योजनाओं को बंद कर दिया है। 

16000 की आबादी प्रभावित
अधिशासी अभियंता ने बताया कि उठाऊ पेयजल योजना परौर खड़ौठ, पुड़बा बलोटा, जोना चौकी, थलियाल,भनार,थुरल भ्रांता, लाहड़ू बछवाई, कोना फिरी, डूहक धनियारा, मूंढी और खजूरनू में न्यूगल नदी के स्रोतों से पानी उठाना (लिफ्ट करना) तब तक रोक दिया गया है जब तक कि सैंपल की जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती। जैसे ही वीरवार को पानी की सैंपल रिपोर्ट आ जाएगी पानी की योजनाएं सुचारू रूप से बहाल कर दी जाएंगी।  विभाग द्वारा पानी की गुणवत्ता की जांच की जा रही है और उसे शुद्ध करने के प्रयास भी जारी हैं। इस कारण लगभग 16,000 की आबादी प्रभावित होने की संभावना है।

31 मार्च को भी ऐसे ही मार दी थीं मछलियां
इससे पहले भी 31 मार्च को किसी ने जहरीली दवाई डाल दी थी, जिससे हजारों मछलियां मर गई थीं। यहां तक कि पेयजल के भी सैंपल जांच को भेजे थे और फिर जांच रिपोर्ट सही आने पर मात्र एक अपील करके सभी विभागों ने मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया था। बेजुबान मछलियों को मारने वालों को इसी विभागीय ढील की शह मिली और नतीजा आपके सामने है, एक बार फिर मछलियां मार दीं गईं। वहीं असिस्टैंट डायरैक्टर पालमपुर राकेश कुमार ने संपर्क करने पर बताया कि मतस्य पालन विभाग की टीम मौके पर भेज दी गई है। जो भी उचित कार्रवाई होगी, अमल में लाई जाएगी।

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