BJP विधायक को राहत, हिमाचल HC ने कांग्रेस नेता की चुनाव याचिका की खारिज

Edited By Swati Sharma, Updated: 23 Aug, 2026 12:02 PM

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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री राम लाल ठाकुर की उस चुनावी याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने नैना देवी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक रणधीर शर्मा के चुनाव को चुनौती दी थी।

Shimla News : हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री राम लाल ठाकुर की उस चुनावी याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने नैना देवी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक रणधीर शर्मा के चुनाव को चुनौती दी थी।

दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस उम्मीदवार लाल ठाकुर ने वोटों की गिनती, पोस्टल बैलेट और कथित भ्रष्ट तौर-तरीकों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए याचिका दायर की थी। चुनाव 12 नवंबर, 2022 को हुए थे और वोटों की गिनती 8 दिसंबर, 2022 को हुई थी। सुनवाई के दौरान, रणधीर शर्मा ने याचिका में कानूनी कमियों पर आपत्ति जताई। उन्होंने खास तौर पर 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 83(1), 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के नियम 94-A और 'फॉर्म 25' के अनुसार हलफनामा दाखिल न करने का हवाला दिया। 26 सितंबर, 2025 के अपने पिछले आदेश में, हाई कोर्ट ने पाया था कि याचिकाकर्ता का हलफनामा तय नियमों के मुताबिक नहीं था। कोर्ट ने राम लाल ठाकुर को 15 अक्टूबर, 2025 तक नया हलफनामा दाखिल करने का मौका दिया था और साफ किया था कि नियमों का पालन न करने पर CPC के 'ऑर्डर VII, नियम 11' के तहत याचिका खारिज कर दी जाएगी।

वहीं, ठाकुर ने अक्टूबर 2025 में नया हलफनामा दाखिल किया, लेकिन रणधीर शर्मा ने इस पर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि यह हलफनामा भी कोर्ट के आदेश और कानूनी प्रावधानों के मुताबिक नहीं था। आखिरी सुनवाई में, हाई कोर्ट ने 'फॉर्म 25' और याचिकाकर्ता के हलफनामे की जांच की। कोर्ट ने पाया कि वे 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 83(1) और 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के नियम 94-A की अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं करते थे। कोर्ट ने गौर किया कि किसी भी पक्ष ने 26 सितंबर, 2025 के आदेश को चुनौती नहीं दी थी, इसलिए वह आदेश अंतिम हो गया था। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ता उस आदेश में दिए गए निर्देशों का पालन करने में विफल रहा। इसी आधार पर, कोर्ट ने राम लाल ठाकुर की चुनावी याचिका खारिज कर दी और सभी लंबित आवेदनों का निपटारा कर दिया। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी ने कहा कि इससे साफ पता चलता है कि चुनाव याचिका को बनाए रखने के लिए जरूरी कानूनी औपचारिकताओं और अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

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