हिमाचल सरकार ने वन्यजीव और सीमांत परियोजनाओं को दी मंजूरी, बंदरों की आबादी का पंचायत-वार मांगा डेटा

Edited By Swati Sharma, Updated: 25 Oct, 2026 10:21 AM

himachal government grants approval for wildlife and border projects

हिमाचल प्रदेश सरकार ने शनिवार को औद्योगिक विकास, सीमांत बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को यहां राज्य वन्यजीव बोर्ड की 12वीं बैठक की अध्यक्षता की।

Shimla News : हिमाचल प्रदेश सरकार ने शनिवार को औद्योगिक विकास, सीमांत बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को यहां राज्य वन्यजीव बोर्ड की 12वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में कांगड़ा जिले के देहरा उपमंडल के बनखंडी में निर्माणाधीन ‘दुर्गेश अरण्य प्राणी उद्यान' की प्रगति की समीक्षा की गयी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिये तथा राज्य में बंदरों की आबादी का पंचायत-वार डेटा मांगा। बोर्ड ने विकास संबंधी आवश्यकताओं, राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण के मद्देनजर गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए वन भूमि के हस्तांतरण से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की। विचार-विमर्श के बाद पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लागू वैधानिक प्रावधानों व शर्तों के अधीन सभी प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गयी। बोर्ड ने कांगड़ा जिले के संसारपुर टेरेस स्थित औद्योगिक क्षेत्र के फेज-1 के प्लॉट संख्या 53 और 54 में‘सीएमजी बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड'द्वारा एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (एपीआई) और मध्यवर्ती विनिर्माण इकाई की स्थापना को मंजूरी दी। इसके अलावा बोर्ड ने किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में रणनीतिक सीमांत बुनियादी ढांचे के लिए वन भूमि के हस्तांतरण के प्रस्तावों पर भी विचार किया। इनमें लाहौल-स्पीति के काजा स्थित मुहाल लालुंग और धार चोकुला में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 17वीं बटालियन के बॉडर्र आउट पोस्ट‘लालुंग'की स्थापना के लिए 1.78 हेक्टेयर, तथा किन्नौर जिले में आईटीबीपी की दूसरी बटालियन के फॉरवर्ड पोस्ट ‘निथल ठाच' के लिए 1.60 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। बोर्ड ने किन्नौर जिले की सांगला तहसील के नगास्ती में सैन्य बुनियादी ढांचे के लिए रक्षम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य के भीतर 0.275 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी।

यह परियोजना 11 महार रेजीमेंट/मुख्यालय 136 (इंडिपेंडेंट) इन्फैंट्री ब्रिगेड ग्रुप ने प्रस्तावित की है। एक अन्य प्रस्ताव‘गोयल फर्नेस प्राइवेट लिमिटेड'की मौजूदा सेकेंडरी धातुकर्म (मैटलर्जिकल) इकाई के विस्तार से संबंधित था। इस विस्तार से एमएस इंगोट्स की उत्पादन क्षमता 19,200 टन से बढ़कर 96,600 टन प्रति वर्ष हो जायेगी। इसमें सालाना 77,280 टन राउंड, एंगल, चैनल, टीएमटी बार और फ्लैटों का निर्माण करने के लिए एक अतिरिक्त इंडक्शन फर्नेस, एक सतत ढलाई मशीन और एक रोलिंग मिल स्थापित करना भी शामिल है। इसके अलावा बोर्ड ने मंडी जिले में हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के सराज मंडल के तहत भूला-शिकारी देवी मार्ग के चौड़ीकरण और उन्नयन के लिए शिकारी देवी वन्यजीव अभयारण्य की 4.72 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण को मंजूरी दी।

मंडी के सुकेत वन मंडल में कीरतपुर-मनाली फोर-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-154) के पुंग-भुवाना सुरंग खंड के आसपास वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी चर्चा की गयी। विचार-विमर्श में इस मार्ग पर सड़क हादसों में होने वाली वन्यजीवों की मौत को कम करने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश डाक परिमंडल, शिमला के सहयोग से हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्यजीव शाखा द्वारा जारी दो पोस्टकार्ड शृंखलाओं‘हिमाचल्स वाइल्ड आइकन्स' और ‘हिमाचल्स वाइल्ड हेरिटेज' का विमोचन किया। उन्होंने वन बल प्रमुख संजय सूद लिखित पुस्तक ‘सिम्प्लीफाइड प्रोसीजर्स फॉर एनालिसिस ऑफ फिजियो केमिकल टेस्ट्स इन वॉटर सैंपल्स' का भी विमोचन किया। 

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