Himachal : सिख समुदाय पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप, उत्तराखंड क्रांति दल के नेता के खिलाफ मामला दर्ज

Edited By Swati Sharma, Updated: 29 Jun, 2026 01:24 PM

himachal allegation of objectionable remarks against sikh community

Sirmaur News : हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में सिख समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में एक स्थानीय संगठन के नेता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, उत्तराखंड क्रांति दल के नेता आशीष...

Sirmaur News : हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में सिख समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में एक स्थानीय संगठन के नेता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। 

पुलिस के अनुसार, उत्तराखंड क्रांति दल के नेता आशीष नेगी के खिलाफ पोंटा साहिब निवासी परमजीत सिंह बंगा की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि नेगी ने कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों और निहंगों के बीच हुए विवाद पर टिप्पणी की थी, जिससे सिख समुदाय के एक वर्ग में नाराजगी पैदा हुई। आरोप है कि नेगी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा, ''खालिस्तान आंदोलन उत्तराखंड में चलाया जा रहा है।'' भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 किसी भी वर्ग के नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से आहत करने के उद्देश्य से किए गए कृत्यों से संबंधित है। यह पूर्व भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295ए के समकक्ष है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पोंटा पुलिस ने अभी तक इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया है और संबंधित वीडियो की जांच कर रही है। 

'मेरे वीडियो को तोड़-मरोड़कर और टुकड़ों में दिखाया जा रहा'

इस बीच, सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए एक अन्य वीडियो में नेगी ने कहा, ''मेरे वीडियो को तोड़-मरोड़कर और टुकड़ों में दिखाया जा रहा है, ताकि सनसनी फैलाई जा सके और अराजकता का माहौल बनाया जा सके।'' उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है जिससे किसी की भावनाएं आहत हों। हाल ही में उत्तराखंड के कर्णप्रयाग की एक स्थानीय अदालत ने चमोली जिले में स्थानीय लोगों के साथ हिंसक झड़प के मामले में शामिल चार निहंगों को जमानत दे दी थी। यह जमानत उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर 300 से अधिक निहंगों द्वारा पुलिस के साथ लगभग पांच दिनों तक चले गतिरोध के बाद मिली थी। 

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