Edited By Swati Sharma, Updated: 09 Oct, 2026 03:01 PM

जिला कांगड़ा की ग्राम पंचायतों में महिला प्रधानों के कामकाज को लेकर सामने आ रही शिकायतों पर पंचायती राज विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचित महिला प्रधान के स्थान पर यदि उनके पति या परिवार का कोई अन्य सदस्य पंचायत के...
Kangra News : जिला कांगड़ा की ग्राम पंचायतों में महिला प्रधानों के कामकाज को लेकर सामने आ रही शिकायतों पर पंचायती राज विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचित महिला प्रधान के स्थान पर यदि उनके पति या परिवार का कोई अन्य सदस्य पंचायत के प्रशासनिक अथवा वित्तीय कार्यों में हस्तक्षेप करता पाया गया तो जांच के बाद संबंधित प्रधान के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। दोष साबित होने पर निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है।
जिला प्रशासन के पास लगातार ऐसी शिकायतें पहुंच रही हैं, जिनमें आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की जगह उनके पति या परिवार के अन्य सदस्य बैठकों में निर्णय लेने और सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर आरोप हैं कि राजनीतिक द्वेष के चलते विकास कार्यों की फाइलें लटकाई जा रही हैं या जनहित से जुड़े कार्यों को जानबूझकर गति नहीं दी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य किसी राजनीतिक मतभेद का शिकार नहीं होने दिए जाएंगे। यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी जनप्रतिनिधि ने जानबूझकर जनहित के कार्यों में बाधा डाली या विकास कार्यों में लापरवाही बरती, तो उसके खिलाफ भी प्रशासनिक जांच के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कांगड़ा जिला पंचायत अधिकारी सचिन ठाकुर ने बताया, "अधिकांश महिला प्रधान बहुत वेहतरीन कार्य कर रही हैं, लेकिन जहां भी अनधिकृत हस्तक्षेप या विकास कार्यों में लापरवाही की शिकायतें मिलती हैं, उनकी पूरी निष्पक्षता से जांच की जाती है। यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है, तो नियमों के तहत तत्काल निलंवन जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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