Edited By Vijay, Updated: 24 May, 2026 11:19 PM

शातिर साइबर ठग अब इंटरनैशनल स्कॉलरशिप के नाम पर छात्रों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। पुलिस भी इस संबंध में विभिन्न माध्यमों से जागरूक कर रही है।
शिमला (ब्यूरो): शातिर साइबर ठग अब इंटरनैशनल स्कॉलरशिप के नाम पर छात्रों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। पुलिस भी इस संबंध में विभिन्न माध्यमों से जागरूक कर रही है। सामने आया है कि जालसाज फर्जी ई-मेल, नकली विश्वविद्यालय वैबसाइट और फेक वैरिफिकेशन कॉल के माध्यम से छात्रों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। कई छात्रों और अभिभावकों को ऐसे संदेश भेजे जा रहे हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि उनका चयन इंटरनैशनल स्कॉलरशिप के लिए हो गया है। इसके लिए ठग नामी विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के नाम व प्रतीकों का इस्तेमाल कर संदेशों को असली जैसा दिखाने की कोशिश करते हैं।
सीमित सीटें, अंतिम तिथि और तत्काल सत्यापन जैसे शब्दों का कर रहे उपयोग
शातिर ठगों द्वारा संदेशों में सीमित सीटें, अंतिम तिथि और तत्काल सत्यापन जैसे शब्दों का उपयोग कर छात्रों पर जल्द निर्णय लेने का दबाव बनाया जाता है। इसके बाद कथित प्रोसैसिंग शुल्क जमा करवाने, बैंक खाते की जानकारी देने, एटीएम कार्ड विवरण सांझा करने या ओटीपी बताने के लिए कहा जाता है। ऐसे में कई छात्र बेहतर शिक्षा और विदेशी छात्रवृत्ति पाने की इच्छा में जल्दबाजी कर बैठते हैं, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं।
पहले करवाते हैं फर्जी वैबसाइट पर आवेदन, फिर चुरा लेते हैं निजी जानकारी
यह भी सामने आया है कि ठग विभिन्न लिंक के माध्यम से छात्रों को फर्जी वैबसाइट पर ले जाकर आवेदन करने को कहते हैं, जिसके बाद उनकी निजी जानकारी और बैंक संबंधी विवरण चुरा लिए जाते हैं। वहीं, कई बार फोन कॉल के जरिए खुद को विश्वविद्यालय अधिकारी बताकर छात्रों से धनराशि जमा करवाने की कोशिश की जाती है। ऐसे में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने छात्रों और अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की है। देखा जाए तो जागरूकता और सतर्कता ही इस प्रकार की ऑनलाइन ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है। छात्रों को किसी भी आकर्षक प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल करनी चाहिए, ताकि वे साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।
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