देववाणी : अठारह करडू की देव परंपराओं से छेड़छाड़ नहीं होगी बर्दाश्त, नई पीढ़ी को बरकरार रखने होंगे नियम

Edited By Kuldeep, Updated: 17 Oct, 2026 09:30 PM

balichowki devvani

अठारह करडू यानी 33 कोटि देवी-देवताओं की देव परंपराओं, नियमों और देव स्थलों की पवित्रता बनाए रखना हर व्यक्ति का दायित्व है।

बालीचौकी (फरेंद्र): अठारह करडू यानी 33 कोटि देवी-देवताओं की देव परंपराओं, नियमों और देव स्थलों की पवित्रता बनाए रखना हर व्यक्ति का दायित्व है। देव परंपराओं से खिलवाड़ करने और पूर्वजों की ओर से बनाए गए नियमों की अवहेलना करने पर इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। मंडी जिले के सराज के पंजाई में शनिवार सुबह देव मार्कंडेय ऋषि की उपस्थिति और देव पुंडरीक ऋषि के सान्निध्य में विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए महायज्ञ का आयोजन किया। महायज्ञ के माध्यम से देवभूमि हिमाचल समेत पूरे विश्व पर आने वाले खतरों को दूर करने और जनकल्याण की कामना की गई। महायज्ञ संपन्न होने के बाद दोनों देवताओं ने देववाणी के माध्यम से देव परंपराओं का पालन करने, देव स्थलों की पवित्रता बनाए रखने और सदियों से चली आ रही मान्यताओं को कायम रखने का संदेश दिया।

देव पुंडरीक ऋषि के पुजारी सोहन लाल और देव मार्कंडेय ऋषि के गूर जय देव ने बताया कि महायज्ञ संपन्न होने के बाद दोनों देवताओं ने देववाणी की। इसमें देव परंपराओं, नियमों और देवभूमि की मर्यादा को बनाए रखने पर जोर दिया गया। देववाणी में संदेश दिया गया कि बुजुर्गों की ओर से स्थापित परंपराओं और नियमों को वर्तमान पीढ़ी को भी उसी निष्ठा के साथ निभाना होगा। देव स्थलों की पवित्रता बनाए रखना और देव संस्कृति का सम्मान करना सभी का दायित्व है।

दो दशक बाद हुआ महायज्ञ, सुख-समृद्धि और खुशहाली का दिया आशीर्वाद
दो दशक बाद देव मार्कंडेय ऋषि और देव पुंडरीक ऋषि की उपस्थिति में आयोजित हुए इस महायज्ञ का उद्देश्य विश्व शांति, मानव कल्याण और समस्त जगत की सुख-समृद्धि की कामना करना रहा। देव मान्यता के अनुसार देव मार्कंडेय ऋषि देव पुंडरीक ऋषि के कुल पुरोहित हैं। इसलिए महायज्ञ देव मार्कंडेय ऋषि सुनारू के द्वारा ही किया जाता है। ऐसे में दोनों देवताओं की उपस्थिति में संपन्न हुए इस महायज्ञ का देव संस्कृति और स्थानीय देव परंपराओं में विशेष महत्व रहा।

देव मिलन की परंपरा जारी रखने का आदेश, अवहेलना पर भुगतना होगा खामियाजा
महायज्ञ संपन्न होने के बाद दोनों देवताओं की देववाणी में वर्षों से चली आ रही देव मिलन की परंपरा को आगे भी जारी रखने का आदेश दिया गया। देववाणी में कहा गया कि जब भी देवता आपस में देव मिलन का आदेश दें तो दोनों हारियों के देवलुओं को इस परंपरा का पालन करते हुए देव मिलन करवाना होगा। देवताओं के आदेश की अवहेलना करने पर इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

1200 से 1500 लोगों ने श्रद्धानुसार अर्पित किया अनाज
महायज्ञ में करीब 1200 से 1500 लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रति परिवार एक से दो किलो अनाज अर्पित किया। यह अनाज देव मार्कंडेय ऋषि को समर्पित किया गया, जिसे अब देव मार्कंडेय ऋषि की पावन भूमि सुनारू लाया जाएगा। श्रद्धालुओं ने अनाज अर्पित कर अपनी आस्था प्रकट की।

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