Edited By Kuldeep, Updated: 14 Apr, 2026 08:07 PM

हिमाचल में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितम्बर) के दौरान बारिश का मिजाज मिला-जुला रहने वाला है।
शिमला: हिमाचल में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितम्बर) के दौरान बारिश का मिजाज मिला-जुला रहने वाला है। मौसम केंद्र शिमला द्वारा जारी दीर्घावधि पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में इस बार मानसून की रफ्तार सुस्त रहने की संभावना है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के अधिकांश जिलों में वर्षा सामान्य से कम रहने के आसार हैं। हालांकि कुछ क्षेत्रों के लिए राहत की खबर भी है।
लाहौल-स्पीति जिले में मानसून सामान्य से अधिक रहने की संभावना जताई गई है। चम्बा, किन्नौर और हमीरपुर जिलों के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य के करीब रहने का अनुमान है। केवल हिमाचल ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मानसून इस बार थोड़ा कमजोर रह सकता है। विभाग के अनुसार पूरे देश में जून से सितम्बर के दौरान दीर्घावधि औसत की 92 फीसदी वर्षा होने की संभावना है।
1971-2020 की अवधि के आधार पर पूरे देश के लिए इस ऋतु का औसत 87 सैंटीमीटर है। हिमाचल प्रदेश के लिए मानसून की सामान्य वर्षा का औसत 734.4 मिलीमीटर है। वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में प्रशांत क्षेत्र में ला नीना जैसी स्थितियां कमजोर हो रही हैं और मानसून ऋतु के दौरान अल नीनो की स्थितियां विकसित होने की संभावना है। आमतौर पर अल नीनो का मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। हालांकि हिंद महासागर में सकारात्मक इंडियन ओशन डाइपोल विकसित होने की संभावना है, जो मानसून के लिए बेहतर माना जाता है।
अगले 4 दिन अंधड़ और ओलावृष्टि की चेतावनी
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने प्रदेश में आगामी 17 से 20 अप्रैल तक मौसम के खराब रहने की चेतावनी जारी की है। इस दौरान मैदानी और मध्य पर्वतीय इलाकों में तेज हवाएं चलने, बिजली कड़कने और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि होने की संभावना है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर और कुल्लू के ऊंचे क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बर्फबारी का पूर्वानुमान है, जबकि कांगड़ा, मंडी और शिमला जैसे क्षेत्रों में बारिश की बौछारें गिरेंगी। खराब मौसम के मद्देनजर पर्यटकों और स्थानीय लोगों को ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी गई है। किसान ओलावृष्टि से फसलों को बचाने के लिए एंटी-हैल नैट्स का उपयोग करें।