Edited By Kuldeep, Updated: 17 May, 2026 07:28 PM

हिमाचल प्रदेश में चिलचिलाती धूप और गर्मी के बीच एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, राज्य में 19 मई से लेकर 21 मई तक मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
शिमला (संतोष): हिमाचल प्रदेश में चिलचिलाती धूप और गर्मी के बीच एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, राज्य में 19 मई से लेकर 21 मई तक मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इस दौरान प्रदेश के 3 मुख्य जिलों चम्बा, कांगड़ा व कुल्लू में तेज आंधी, गर्जना और बिजली गिरने को लेकर यैलो अलर्ट जारी किया गया है। इन 3 जिलों में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (तेज हवाएं) चलने की आशंका है। इसके अलावा जनजातीय जिलों किन्नौर और लाहौल-स्पीति में भी 19 से 23 मई के बीच 30-40 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। 22 मई को एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना बन सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार, भले ही बीच में हल्की वर्षा की संभावना है, लेकिन आने वाले 4-5 दिनों के भीतर राज्य के कई हिस्सों में गर्मी का प्रकोप थोड़ा बढ़ेगा। न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सैल्सियस की क्रमिक वृद्धि होगी। अधिकतम तापमान में 2 से 5 डिग्री सैल्सियस तक का उछाल आ सकता है। हालांकि रविवार को राजधानी शिमला सहित राज्य के अधिकांश हिस्सों में दिनभर चटक धूप खिली रही और सोमवार को भी मौसम पूरी तरह साफ रहने का अनुमान है, लेकिन पिछले 24 घंटों में राज्य के ऊंचाई वाले कुछ इलाकों में वर्षा भी हुई है। इनमें सराहन में 18.5, चम्बा में 2 मिलीमीटर के अलावा मनाली, पालमपुर व भुंतर में बूंदाबांदी हुई है। रविवार को सबसे अधिक अधिकतम तापमान ऊना में 37.4 डिग्री और राजधानी शिमला में 26.1 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।
आंधी-तूफान के मद्देनजर मौसम विभाग की सलाह
अपेक्षित खराब मौसम को देखते हुए मौसम केंद्र ने ऊंचे और मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों और पर्यटकों के लिए कुछ जरूरी सलाह जारी की है। तेज हवाओं के कारण कमजोर होर्डिंग्स और छतें उड़ सकती हैं, मलबे से सावधान रहें। कंक्रीट के फर्श पर न लेटें और न ही दीवारों का सहारा लें। बिजली के उपकरणों के प्लग निकाल दें। आंधी-तूफान के समय पेड़ों के नीचे शरण बिल्कुल न लें और जल स्रोतों (नदी, तालाब) से तुरंत दूर हट जाएं।