Edited By Kuldeep, Updated: 19 May, 2026 06:16 PM

स्कूल शिक्षा विभाग इस बार टीचर अवार्ड के नियमों में बड़े संशोधन की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत अब वही शिक्षक टीचर अवार्ड के लिए पात्र माने जाएंगे, जिनकी कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति 100 प्रतिशत रहेगी।
शिमला (प्रीति): स्कूल शिक्षा विभाग इस बार टीचर अवार्ड के नियमों में बड़े संशोधन की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत अब वही शिक्षक टीचर अवार्ड के लिए पात्र माने जाएंगे, जिनकी कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति 100 प्रतिशत रहेगी। विभाग का मानना है कि इससे स्कूलों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी और शिक्षक भी इस दिशा में अधिक गंभीरता से काम करेंगे। इसी कड़ी में विभाग ने स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा तक छात्रों के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। अब उन्हीं छात्रों को वार्षिक परीक्षाओं में बैठने दिया जाएगा, जिनकी हाजिरी 75 प्रतिशत या इससे अधिक होगी। ऐसे में अब टीचर अवार्ड में भी छात्र उपस्थिति को अहम आधार बनाया जा रहा है। यानि इसे टीचर अवार्ड में शामिल किया जा रहा है।
इसके साथ ही इस बार शिक्षकों की असैसमैंट भी दूसरे जिलों के शिक्षकों से करवाई जाएगी, जिसमें यह शिक्षक अवार्ड के लिए नामित शिक्षक के स्कूल में जाकर स्पॉट निरीक्षण और उसका मूल्यांकन करेंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस प्रक्रिया से टीचर अवार्ड चयन में पारदर्शिता आएगी और निष्पक्ष तरीके से मूल्यांकन हो सकेगा। हालांकि अभी इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा जाना है, लेकिन विभाग स्तर पर इस संशोधन को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है। विभाग की मानें तो टीचर अवार्ड के बाकी नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे।
मौजूदा समय में यह है व्यवस्था
मौजूदा समय में शिक्षा निदेशालय की ओर से गठित टीमें हर जिलों में आवेदकों की स्पॉट वैरीफिकेशन करती हैं। शिक्षा निदेशालय स्तर की कमेटी इनमें से शिक्षकों के नाम शॉर्टलिस्ट कर राज्य स्तरीय कमेटी को भेजती है। इन शिक्षकों का साक्षात्कार और प्रैजैंटेशन इस राज्य स्तरीय कमेटी के सामने लिए जाते हैं। यह कमेटी राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए शिक्षकों का चयन करती है। पुरस्कार के लिए पिछले 5 वर्षों का परीक्षा परिणाम, जनजातीय क्षेत्रों में दी गई सेवाएं और उल्लेखनीय कार्यों के आधार पर ही पुरस्कार के लिए चयन किया जाता है।