Edited By Kuldeep, Updated: 24 Jun, 2026 10:21 PM

प्रदेश हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में जारी शास्त्री अध्यापकों की मैरिट सूची को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए इसे जायज ठहराया है।
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में जारी शास्त्री अध्यापकों की मैरिट सूची को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए इसे जायज ठहराया है। कोर्ट ने परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के संदर्भ में स्पष्ट किया कि अगर उत्तर में कोई शक हो तो इसका फायदा उम्मीदवार की बजाय परीक्षा लेने वाली संस्था को मिलना चाहिए। न्यायाधीश रंजन शर्मा ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि एक बार जब एक्सपर्ट्स आपत्तियों पर विचार करने के बाद फाइनल आंसर की जारी कर देते हैं तो ऐसे मामलों में सहानुभूति या दया की कोई भूमिका नहीं रह जाती।
अगर जवाबों को लेकर कोई शक हो (यानी जब 2 या उससे ज्यादा जवाब सही लग रहे हों) और यह बात उत्तर कुंजी और आपत्ति/अभ्यावेदन के जरिए दी गई जानकारी में दिख रही हो तो इसका फायदा परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था को मिलना चाहिए, क्योंकि उन्हें इस मामले की विशेषज्ञता हासिल है। ऐसी स्थितियों में सहानुभूति या दया की कोई भूमिका नहीं होती। कोर्ट ने शास्त्री पद (पोस्ट कोड नंबर 361) के लिए अंतिम 'आंसर की' को सही ठहराया है, साथ ही 28 नवम्बर, 2014 की अंतिम मैरिट सूची/परिणाम को भी सही माना गया है। कोर्ट ने फाइनल 'आंसर की' और अंतिम मैरिट सूची पर दोबारा विचार करने की याचिकाकर्त्ता की मांग को खारिज कर दिया।