Edited By Vijay, Updated: 17 Jun, 2026 08:24 PM

हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और ग्रामीण इलाकों में बेहतरीन सुविधाएं देने के बड़े-बड़े सरकारी दावों की मंडी जिले के करसोग में धज्जियां उड़ रही हैं। उपमंडल करसोग के प्रारम्भिक शिक्षा खंड चुराग-द्वितीय के तहत आने वाली ग्राम पंचायत...
करसोग (धर्मवीर गौतम): हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और ग्रामीण इलाकों में बेहतरीन सुविधाएं देने के बड़े-बड़े सरकारी दावों की मंडी जिले के करसोग में धज्जियां उड़ रही हैं। उपमंडल करसोग के प्रारम्भिक शिक्षा खंड चुराग-द्वितीय के तहत आने वाली ग्राम पंचायत बेलरधार की प्राथमिक पाठशाला खडूहण का भवन जर्जर होकर किसी बड़े हादसे को दावत दे रहा है। वर्षों से प्रशासन की अनदेखी झेल रहे इस स्कूल की हालत देखकर अब अभिभावकों और ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया है।
दरक चुके पिल्लर और बीम, टूटकर गिर रही छत
ग्रामीणों का कहना है कि नौनिहालों को मौत के साये में बैठकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। स्कूल भवन की छतें लगातार टूटकर नीचे गिर रही हैं, जबकि भवन के पिलर और बीम बुरी तरह दरक चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों और प्रशासन को इस दयनीय स्थिति से अवगत करवाया, लेकिन आज तक किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी।
डर के मारे स्कूल छोड़ रहे बच्चे
भवन की इस खौफनाक स्थिति का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। बच्चों की जान जोखिम में देखकर खौफजदा अभिभावक अपने बच्चों को इस स्कूल से निकालकर अन्य सुरक्षित विद्यालयों में भेजने को मजबूर हो गए हैं। इससे पाठशाला में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। ग्रामीणों ने चिंता जताते हुए कहा कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह दम तोड़ देगी।
ग्रामीणों का सवाल-विकास केवल कागजों और घोषणाओं तक ही सीमित क्यों?
खडूहण स्कूल की यह तस्वीर सरकार के उन दावों की हकीकत बयां कर रही है, जिनमें शिक्षा के नाम पर करोड़ों के बजट की बात कही जाती है। ग्रामीणों का तीखा सवाल है कि विकास केवल कागजों और नेताओं की घोषणाओं तक ही सीमित क्यों है? अगर देश के भविष्य (नौनिहालों) को बैठने के लिए एक सुरक्षित छत तक नसीब नहीं हो पा रही है, तो ऐसी विकास व्यवस्था पर एक गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है।

ग्रामीणों ने क्रमिक अनशन और चक्का जाम की दी चेतावनी
प्रशासन के कानों तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। नाराज अभिभावकों ने फैसला लिया है कि वे वीरवार से स्कूल को लेकर क्रमिक अनशन शुरू करेंगे। अभिभावकों ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक स्कूल भवन को सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता या बच्चों के बैठने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक वे अपने बच्चों को इस जर्जर भवन में नहीं भेजेंगे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि यदि जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन उग्र किया जाएगा और 'चक्का जाम' जैसे सख्त कदम उठाए जाएंगे।
हिमाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें