Edited By Swati Sharma, Updated: 06 Nov, 2026 01:59 PM

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के बीच दशकों से चले आ रहे उस ऊर्जा विवाद को खत्म कर दिया, जो 1966 से भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड परियोजनाओं से जुड़े बकाया भुगतान को लेकर था।
Himachal News : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के बीच दशकों से चले आ रहे उस ऊर्जा विवाद को खत्म कर दिया, जो 1966 से भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड परियोजनाओं से जुड़े बकाया भुगतान को लेकर था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिसके तहत पंजाब और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश को बकाया राशि का भुगतान नकद के बजाय बिजली के रूप में करेंगे। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था 2011 के उस फैसले के अनुरूप होगी, जिसमें 1966 से भाखड़ा नांगल और ब्यास जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े बिजली बकाये को हिमाचल प्रदेश के पक्ष में 7.19 प्रतिशत की दर से तय किया गया था। अदालत ने कहा कि पंजाब और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश को 20 वर्षों की अवधि में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देंगे। पंजाब सरकार ने शुरू में केंद्र के उस प्रस्ताव का विरोध किया था जिसमें 15 वर्षों के भीतर ऊर्जा बकाया चुकाने की बात कही गई थी। बाद में पंजाब ने इस योजना को 30 वर्षों में लागू करने का सुझाव दिया, जबकि हिमाचल प्रदेश इसे 10 वर्षों के भीतर लागू करना चाहता था। इस प्रस्ताव के तहत, बांधों के निर्माण में आई पुरानी पूंजी लागत (कैपिटल कॉस्ट) के एवज में 420 करोड़ रुपये का समायोजन (एडजस्टमेंट) किया गया है। इसके चलते हिमाचल प्रदेश को पंजाब और हरियाणा को कोई भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी) ने मूल हकदारी की गणना 13,066 मिलियन यूनिट के रूप में की थी। शीर्ष अदालत के 2011 के फैसले के अनुसार, हिमाचल का हिस्सा 7.19 प्रतिशत तय किया गया था, जबकि पंजाब का हिस्सा 51.80 प्रतिशत और हरियाणा का हिस्सा 37.51 प्रतिशत निर्धारित किया गया था। राजस्थान के हिस्से में कोई खास बदलाव नहीं हुआ, जबकि चंडीगढ़ का हिस्सा 3.50 प्रतिशत तय किया गया था। 2011 के फैसले के अनुसार, हिमाचल को 1 नवंबर 1966 से भाखड़ा परियोजना में, नवंबर 1977 से देहर परियोजना में और जनवरी 1978 से पोंग बांध परियोजना में हिस्सा मिलना था।
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