Edited By Kuldeep, Updated: 27 Jun, 2026 07:34 PM

पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे काली घटना थी, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता।
पालमपुर (भृगु): पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे काली घटना थी, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि उस दौर में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कुचलते हुए हजारों लोगों को बिना किसी अपराध के जेलों में बंद कर दिया गया और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया। पालमपुर में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित ‘संविधान की हत्या दिवस’ कार्यक्रम में संबोधित करते हुए शांता कुमार ने कहा कि आपातकाल के दौरान पूरा देश जेलखाने में बदल गया था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर आपातकाल के दौरान जेल गए लोगों और उनके परिजनों को सम्मानित किया गया। प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा लगाया गया आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार था। उन्होंने कहा कि उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित कई संगठनों के कार्यकर्त्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री बिक्रम ठाकुर, पूर्व विधायक राजेश ठाकुर, रविंद्र रवि और जिला भाजपा अध्यक्ष रागिनी रुकवाल सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्त्ता मौजूद रहे।
भाजपा के बदलते स्वरूप पर जताई चिंता
शांता कुमार ने भाजपा के बदलते स्वरूप पर भी चिंता जताते हुए कहा कि कभी कार्यकर्त्ताओं की पार्टी कहलाने वाली भाजपा अब नेताओं की पार्टी बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी का मूल मंत्र ‘देश प्रथम, पार्टी द्वितीय और मैं तृतीय’ था, लेकिन आज कुछ लोगों में ‘मैं प्रथम’ की भावना बढ़ रही है। उन्होंने समर्पित कार्यकर्त्ताओं की भूमिका को पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बताया।