Edited By Kuldeep, Updated: 16 Jun, 2026 04:49 PM

पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि नई पीढ़ी में बढ़ता नशे का प्रकोप एक भयावह सामाजिक संकट बन चुका है।
पालमपुर (भृगु): पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि नई पीढ़ी में बढ़ता नशे का प्रकोप एक भयावह सामाजिक संकट बन चुका है। उन्होंने कहा कि नशे का कारोबार युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहा है और इससे जुड़े लोगों को करोड़ों रुपए का लाभ होने के कारण यह लगातार फैलता जा रहा है। उन्होंने हिमाचल सरकार द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी नौकरियों में भर्ती के दौरान डोप टैस्ट को अनिवार्य करना एक सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, अवैध संपत्तियां जब्त की जा रही हैं तथा दोषी सरकारी कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो रही है।
शांता कुमार ने मुख्यमंत्री द्वारा पंचायतों के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को नशे के खिलाफ शपथ दिलाने की पहल की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नशे जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज को मिलकर इस लड़ाई को लड़ना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री प्रदेश की धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संस्थाओं की संयुक्त बैठक बुलाकर नशे के खिलाफ व्यापक कार्ययोजना तैयार करें। उनका कहना था कि पूरे प्रदेश को एकजुट होकर नशा मुक्त अभियान चलाना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में सभी प्रकार के चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए डोप टैस्ट अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पंचायत और नगर निकाय चुनावों से पहले ऐसा नियम लागू किया जाए तो यह राजनीति में बड़ा सुधार साबित हो सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि नशे के खिलाफ अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जाए और समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित कर हिमाचल को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जाए।