Edited By Kuldeep, Updated: 31 Oct, 2026 06:40 PM

पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने देश में दवाइयों की आसमान छूती कीमतों पर चिंता जताते हुए कहा कि एमआरपी के नाम पर मरीजों से भारी लूट हो रही है।
पालमपुर (भृगु): पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने देश में दवाइयों की आसमान छूती कीमतों पर चिंता जताते हुए कहा कि एमआरपी के नाम पर मरीजों से भारी लूट हो रही है। उन्होंने कहा कि 27 रुपए की लागत वाली दवा का 27 हजार रुपए तक बिकना बेहद चिंताजनक है। इस गंभीर समस्या पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। शांता कुमार ने कहा कि जैनेरिक और ब्रांडेड दवाइयों की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं होता, लेकिन जैनेरिक दवाइयां काफी सस्ती होती हैं।
उन्होंने बताया कि कैंसर की एक ब्रांडेड दवा की कीमत करीब 80 हजार रुपए थी, जबकि उसी दवा का जैनेरिक संस्करण उपलब्ध होने पर कीमत घटकर लगभग 6 हजार रुपए रह गई। उन्होंने अपने राज्यसभा कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि वाणिज्य संबंधी संसदीय समिति ने दवाइयों की कीमतों पर विचार-विमर्श के बाद सरकार को सुझाव दिया था कि डॉक्टरों के लिए मरीजों को केवल जैनेरिक दवाइयां लिखना अनिवार्य किया जाए।
इसके साथ ही दवा कंपनियों के मुनाफे को उत्पादन लागत के 20 प्रतिशत तक सीमित करने की सिफारिश भी की गई थी, लेकिन इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। शांता कुमार ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा डॉक्टरों को केवल जैनेरिक दवाइयां लिखने के निर्देश जारी करने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसे निर्देश जारी हुए थे, लेकिन उनका प्रभावी पालन नहीं हुआ। इस बार इन्हें सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैनेरिक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित होने और डॉक्टरों द्वारा इन्हें लिखे जाने से करोड़ों मरीजों को राहत मिलेगी तथा इलाज का खर्च कम होगा।