हाईकोर्ट के आदेश पर मालिक को मिला पुन: कब्जा, इंदौरा-पठानकोट वाया डाहकुलाड़ा-मोहटली मुख्य मार्ग किया बंद

Edited By Vijay, Updated: 20 Jun, 2026 10:30 AM

owner got re possession on high court s order

इंदौरा-पठानकोट वाया डाहकुलाड़ा-मोहटली मार्ग भूमि के मालिक द्वारा बंद कर दिया गया है। मालिक द्वारा मुख्य मार्ग पर तारबंदी करने के साथ-साथ मिट्टी के ढेर लगाकर इसे बंद कर दिया गया है....

इंदौरा/डमटाल (अजीज/सिमरन): इंदौरा-पठानकोट वाया डाहकुलाड़ा-मोहटली मार्ग भूमि के मालिक द्वारा बंद कर दिया गया है। मालिक द्वारा मुख्य मार्ग पर तारबंदी करने के साथ-साथ मिट्टी के ढेर लगाकर इसे बंद कर दिया गया है, जिससे अब पठानकोट जाने वाले भपू से मोहटली तक के दर्जनों गांवों के लोगों को समस्या का सामना तो करना ही पड़ेगा, साथ ही आपात स्थिति में रेल विभाग द्वारा उक्त मार्ग पर बनाए गए अंडरब्रिज का लाभ लेने से भी लोग अब वंचित हो गए हैं। यह कार्य माननीय उच्च न्यायालय के एक निर्णय की अनुपालना में किया गया है।

ये है मामला
बता दें कि लोक निर्माण विभाग द्वारा विकास के नाम पर जनता के लिए रघुबीर सिंह पुत्र प्रीतम सिंह निवासी गांव, महाल व मौजा मोहटली, तहसील इंदौरा, जिला कांगड़ा की खसरा नंबर 904, 905 व 908 मिलकीयती भूमि पर मार्ग तो बना दिया, लेकिन भूमि के मालिक को इसका कोई मुआवजा नहीं दिया गया, जिस पर रघुवीर सिंह (वादी) द्वारा लोक निर्माण विभाग पर मुआवजा दिए जाने हेतु न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी इंदौरा की अदालत में वर्ष 2012 को मामला दायर किया गया,  जिस पर माननीय न्यायालय ने वर्ष 2017 में उक्त वादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए लोक निर्माण विभाग को उसे उचित मुआवजा अदा करने का निर्णय दिया, लेकिन विभाग ने कोई मुआवजा नहीं दिया, अपितु विभाग द्वारा इस मामले में अतिरिक्त जिला सत्र न्यायालय नूरपुर में वर्ष 2018 में अपील दायर की गई, जिस पर माननीय अदालत ने 2019 में न केवल विभाग की अपील खारिज की, बल्कि विभाग के कार्यालय संपत्ति को भी मुआवजा अदा न करने की सूरत में अटैच किए जाने का फैसला दिया। उसके बाद विभाग द्वारा इस मामले की अपील वर्ष 2020 में माननीय प्रदेश उच्च न्यायालय में की गई। वादी पक्ष के अधिवक्ता नितिश बैहल ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2023 में विभाग की उक्त अपील को खारिज करते हुए यह कहा कि या तो वादी को उसकी भूमि का उचित मुआवजा दिया जाए अथवा उसकी भूमि व उसका कब्जा उसे दिया जाए,  लेकिन विभाग द्वारा न तो उसकी भूमि का कब्जा उसे दिया गया और न ही उचित मुआवजा। जिस पर वादी पक्ष द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के उक्त आदेश की अनुपालना में उक्त खसरा नंबरान की 58 मरले भूमि की दखल वारंट याचिका न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी इंदौरा की अदालत में लगाई गई तथा 2 जून, 2026 को माननीय अदालत द्वारा वादी को उसकी भूमि वापस देने हेतु वारंट दखल जारी कर दिया गया और शुक्रवार को उसे मौका पर पुलिस की मौजूदगी में उसकी भूमि व उसका कब्जा उसे दे दिया गया तथा रघुबीर सिंह ने अपनी उक्त भूमि पर अपने स्वामित्व अधिकार की पैरवी में आम जनमानस के लिए बंद कर दिया। आखिर 33 साल की लड़ाई के बाद रघुबीर के हक में फैसला आया।

औद्योगिक क्षेत्र का यातायात भी बंद
वहीं उक्त मार्ग के बंद होने से मलोट स्थित औद्योगिक क्षेत्र का यातायात इस मार्ग से पूरी तरह से बंद हो गया है, जिससे उद्योगों का उत्पादन व क्रय-विक्रय न केवल प्रभावित हुआ है, बल्कि एक तरह से उक्त क्षेत्र के उद्योगों की औद्योगिक व्यवस्था पूरी तरह ठप्प हो जाएगी। ऐसे में सरकार के लिए आम जनमानस के आवागमन व औद्योगिक विकास हेतु वैकल्पिक व्यवस्था शीघ्र किए जाने की दरकार है।

अब तक खर्च कर चुका 18.50 लाख रुपए
वहीं इस मामले में रघुबीर ने बताया कि उसकी आयु इस समय 59 वर्ष है। वह 25 साल का था, जब पहली बार अपनी जमीन के मुआवजे के लिए दफ्तर गया था। यह उसकी पुश्तैनी जमीन थी, जिसमें से सरकार ने रास्ता तो निकाल लिया और जब से उसने होश संभाला, वह लोक निर्माण विभाग कार्यालयों के चक्कर काट रहा था और मुआवजा दिए जाने की गुहार लगाता रहा तथा विभाग द्वारा उसे उसका ब्याज सहित मुआवजा देने व कई बार प्रस्ताव सरकार को भेजे जाने बारे आश्वासन देता रहा, लेकिन जब उसे कोई मुआवजा नहीं मिला तो थक-हार कर उसने कानून का सहारा लेने का निर्णय लिया, जिस पर संबंधित सैक्शन के तहत सरकार को नोटिस भेजा गया और पर्याप्त समय दिए जाने के बाद भी जब उसे कोई मुआवजा नहीं दिया गया तो वर्ष 2012 में उसने माननीय न्यायालय या रुख किया। उसने बताया कि इस सारे अर्से में उसका 18.50 लाख रुपए खर्च आ गया।

जनता परेशान तो भूमि देने को तैयार अगर सरकार मुआवजा दे
हालांकि रघुबीर सिंह ने यह भी कहा कि यह रास्ता बंद होने से जनता को जो परेशानी हो रही है, उसे वह अच्छी नहीं लग रही और यदि अब भी सरकार उसे उचित मुआवजा राशि अदा करती है तो वह रास्ते हेतु भूमि देने के लिए तैयार है। उसने कहा कि यदि सरकार मुआवजा नहीं दे सकती तो इस मार्ग पर टोल लगाने की अनुमति उसे दी जाए और इस स्थिति में भी वह रास्ता खोल देगा।
 

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