Himachal: जिस दिन निकलनी थी इकलौते बेटे की बारात, उसी दिन उठी पिता की अर्थी; शादी वाले घर में पसरा मातम

Edited By Vijay, Updated: 14 Aug, 2026 09:05 PM

mourning in the wedding house

हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर के लम्बलू क्षेत्र के अंतर्गत आते बालू गांव से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक घर में इकलौते बेटे के सिर पर सेहरा सजने से ठीक पहले पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया।

हमीरपुर (अजय): हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर के लम्बलू क्षेत्र के अंतर्गत आते बालू गांव से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक घर में इकलौते बेटे के सिर पर सेहरा सजने से ठीक पहले पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। जिस घर में शहनाइयों की गूंज और शादी के जश्न का माहौल था, वहां पल भर में चीख-पुकार मच गई और सारी खुशियां मातम में बदल गईं।

मेहंदी की रस्म के बीच बिगड़ी तबीयत, टांडा अस्पताल में तोड़ा दम
जानकारी के अनुसार बालू गांव निवासी 52 वर्षीय केवल पठानिया के इकलौते बेटे विशाल की शादी 12 अगस्त के आस-पास तय थी। घर में मेहमान आ चुके थे और मेहंदी की रस्म की तैयारियां जोरों पर थीं। रिश्तेदार खुशियों में डूबे हुए थे कि तभी बुधवार तड़के करीब 3 बजे केवल पठानिया की गर्दन और गले में अचानक तेज दर्द उठा। स्थिति बिगड़ती देख परिजन उन्हें तुरंत मेडिकल कॉलेज हमीरपुर ले गए। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज (टांडा) रैफर कर दिया, जहां बुधवार शाम को इलाज के दौरान केवल पठानिया ने दम तोड़ दिया।

मंदिर में सादे तरीके से पहनाया मंगलसूत्र, मायके लौटी दुल्हन
टांडा में हुई इस दुखद मृत्यु की खबर जैसे ही गांव पहुंची तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शादी वाले घर में अचानक आई इस विपदा को देखते हुए वर और वधू, दोनों पक्षों ने विकट परिस्थितियों के बीच समझदारी दिखाते हुए रीति-रिवाजों को बेहद संक्षिप्त रूप से निभाने का फैसला लिया। इसके तहत दुल्हन को उसके कुछ परिजनों के साथ एक स्थानीय मंदिर में बुलाया गया। भारी मन और गमगीन माहौल के बीच दूल्हे विशाल पठानिया ने दुल्हन को मंगलसूत्र पहनाया। इस रस्म के तुरंत बाद दुल्हन को वापस उसके मायके भेज दिया गया।

जिस दिन निकलनी थी बारात, उस दिन हुआ अंतिम संस्कार
एक पिता के तौर पर केवल पठानिया ने अपने इकलौते बेटे की बारात 13 अगस्त को बड़ी धूमधाम से ले जाने के तमाम सपने संजोए थे और इसकी पूरी तैयारियां भी कर ली थीं।,लेकिन नियति का खेल देखिए कि जिस दिन घर से बेटे की बारात निकलनी थी, उसी दिन पिता की अर्थी उठी। बुधवार देर रात जब उनका शव गांव पहुंचा तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। वीरवार को भारी बारिश और आंसुओं के बीच उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना से पूरे बालू गांव और आसपास के क्षेत्रों में गहरा शोक व्याप्त है।

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