जिन 20 चोटियों पर कोई कदम नहीं रख पाया...वहां हिमाचल के लाल ने तिरंगा फहराया, रक्षा मंत्री से मिला सम्मान

Edited By Vijay, Updated: 27 Sep, 2026 03:02 PM

mountaineer kewal

हिमाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ी जिला चम्बा के चुराह क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले पर्वतारोही केवल ने अपने अदम्य साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन के दम पर पर्वतारोहण की दुनिया में एक नया मुकाम हासिल किया है।

तीसा/चम्बा (सुभान दीन): हिमाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ी जिला चम्बा के चुराह क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले पर्वतारोही केवल ने अपने अदम्य साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन के दम पर पर्वतारोहण की दुनिया में एक नया मुकाम हासिल किया है। वर्तमान में नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माऊंटेनियरिंग एंड एडवैंचर स्पोर्ट्स (एनआईएमएस) में माऊंटेन इंस्ट्रक्टर के पद पर सेवारत केवल ने देश-विदेश की कई सबसे कठिन और दुर्गम पर्वत चोटियों पर सफलतापूर्वक भारत का तिरंगा फहराकर प्रदेश का नाम रोशन किया है।

कंचनजंगा सहित इन खतरनाक चोटियों पर किया सफल आरोहण
केवल के पर्वतारोहण करियर में कई बड़ी उपलब्धियां शामिल हैं। उन्होंने अब तक माऊंट नन, माऊंट कुन और माऊंट कामेट जैसी चुनौतीपूर्ण पर्वत चोटियों का सफल आरोहण किया है। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक वर्ष 2025 में दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा को सफलतापूर्वक फतह करना रहा। इसके अलावा, हाल ही में एनआईएमएस की ओर से लद्दाख में आयोजित एक विशेष और बेहद कठिन अभियान में केवल ने अपनी टीम के साथ मिलकर इतिहास रच दिया। इस टीम ने महज 23 दिनों के भीतर 6,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली 20 ऐसी चोटियों पर चढ़ाई की, जिन पर इससे पहले कोई नहीं पहुंच सका था।

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1,640 किलोमीटर का महा-स्की अभियान
केवल के करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण और रोमांचक अध्याय उनका 1,640 किलोमीटर लंबा महा-स्की अभियान रहा है। यह अभियान काराकोरम से शुरू होकर लिपुलेख दर्रे तक चला था। इस दौरान उन्होंने अपनी टीम के साथ बेहद दुर्गम और बर्फीले रास्तों को पार करते हुए 6,000 मीटर श्रेणी के 3 पर्वतों पर चढ़ाई की और 25 हाई एल्टीट्यूड (अधिक ऊंचाई वाले) दर्रों को सफलतापूर्वक पार किया।

रक्षा मंत्री से मिला सम्मान जीवन का गौरवपूर्ण क्षण
केवल की इन असाधारण और साहसिक उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। उन्हें देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से व्यक्तिगत रूप से मिलने और सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ है। केवल बताते हैं कि रक्षा मंत्री से मिला प्रोत्साहन उनके जीवन के सबसे गौरवपूर्ण और यादगार क्षणों में से एक है।

पर्वतारोहण सिर्फ खेल नहीं, देश के प्रति समर्पण है : केवल 
अपनी सफलताओं का श्रेय अपनी टीम, वरिष्ठ अधिकारियों, प्रशिक्षकों और सहपाठियों को देते हुए केवल कहते हैं कि टीम भावना के बिना ऐसे खतरनाक अभियानों को पूरा करना असंभव है। उनका मानना है कि पर्वतारोहण केवल चोटियों को फतह करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह साहस, अनुशासन, धैर्य और देश के प्रति समर्पण की कड़ी परीक्षा है। कठिन परिस्थितियां इंसान को मानसिक और शारीरिक रूप से फौलाद बनाती हैं। केवल के लिए पर्वतारोहण सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि देश के तिरंगे को दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर लहराने का एक जुनून है।

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