अंतर्राष्ट्रीय मिंजर मेला: चम्बा की नंदनी के सिर सजा 'मिस मिंजर क्वीन' का ताज, CM सुक्खू ने किया सम्मानित

Edited By Vijay, Updated: 04 Aug, 2026 11:42 AM

miss minjar queen

अंतर्राष्ट्रीय मिंजर मेले के इतिहास में पहली बार आयोजित की गई मिस मिंजर क्वीन प्रतियोगिता का खिताब चम्बा की नंदनी ने अपने नाम कर लिया है। इस सौंदर्य स्पर्धा में कांगड़ा की अर्चिशा फर्स्ट रनरअप और मंडी की श्रेया सैकेंड रनरअप रहीं।

चम्बा (काकू चौहान): अंतर्राष्ट्रीय मिंजर मेले के इतिहास में पहली बार आयोजित की गई मिस मिंजर क्वीन प्रतियोगिता का खिताब चम्बा की नंदनी ने अपने नाम कर लिया है। इस सौंदर्य स्पर्धा में कांगड़ा की अर्चिशा फर्स्ट रनरअप और मंडी की श्रेया सैकेंड रनरअप रहीं। मेले के समापन समारोह में प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विजेता और रनरअप प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार व ट्रॉफी देकर सम्मानित किया। स्थानीय प्रशासन की इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की युवतियों को अपने सौंदर्य, आत्मविश्वास और पारंपरिक परिधानों को प्रदर्शित करने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना था।

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महज 4 दिन की तैयारी में नंदनी ने जीता खिताब
मिस मिंजर क्वीन बनीं नंदनी चम्बा जिले के सुरंगानी क्षेत्र की बियाणा पंचायत की निवासी हैं। वह वर्तमान में बी-फार्मेसी की छात्रा हैं और साथ ही जीपैट की तैयारी कर रही हैं। उनके पिता शेर सिंह राठौर और माता हिमति देवी दोनों शिक्षक हैं। माता-पिता की पोस्टिंग बाहरी जिलों में होने के कारण 8वीं कक्षा तक नंदनी का बचपन अपनी दादी नारो देवी के सानिध्य में बीता। नंदनी अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के निरंतर सहयोग और दादी द्वारा दिए गए आत्मविश्वास को देती हैं। छुट्टियों में घर आईं नंदनी ने जानकारी मिलने पर अचानक ऑडिशन दिया और मात्र 4 दिन की कड़ी मेहनत से यह ताज हासिल किया। उनका मानना है कि चम्बा में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस लड़कियों को झिझक छोड़कर प्रतिस्पर्धाओं में आगे आना चाहिए ताकि उनका आत्मविश्वास बढ़ सके।

कांगड़ा की अर्चिशा के जीवन में दादी सुलोचना का अहम योगदान 
प्रतियोगिता में फर्स्ट रनरअप रहीं अर्चिशा कांगड़ा जिले से संबंध रखती हैं। वह वर्तमान में मनोचिकित्सा की पढ़ाई कर रही हैं। एक मेडिकल छात्रा होने के बावजूद उन्होंने मॉडलिंग का कठिन रास्ता चुना। उनके पिता राजनीतिज्ञ और माता निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। अर्चिशा को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने में उनकी दादी सुलोचना का अहम योगदान रहा है। पढ़ाई के सिलसिले में चंडीगढ़ जाने पर वहां के माहौल में ढलने के अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए अर्चिशा ने कहा कि हिमाचल की लड़कियां बेहद प्रतिभाशाली हैं, लेकिन अक्सर आगे आने से कतराती हैं। इससे पहले मिस नॉर्दर्न इंडिया की रनरअप रह चुकीं अर्चिशा अब बड़ी प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने लड़कियों से घर की दहलीज से बाहर निकलकर अपनी प्रतिभा साबित करने की अपील की।

ऑटो चालक की बेटी श्रेया का मिस यूनिवर्स बनना है सपना
सैकेंड रनरअप का खिताब मंडी के हीरानगर की रहने वाली श्रेया ने जीता है। बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली श्रेया के पिता भीमसेन एक ऑटो चालक हैं और माता रमिता गृहिणी हैं। श्रेया ग्रेजुएशन के बाद डेटा एनालिसिस का कोर्स कर रही हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वह एक फ्रीलांस मॉडल और क्लासिकल डांसर भी हैं, और एक बॉलीवुड फिल्म में अभिनय भी कर चुकी हैं। इससे पहले वह मिस हिमालयन प्रिंसेस का खिताब जीत चुकी हैं, मिस हिमाचल के टॉप-10 में जगह बना चुकी हैं और मिस नॉर्थ इंडिया में भी भाग ले चुकी हैं। अपनी मां को रोल मॉडल मानने वाली श्रेया ने सुष्मिता सेन से प्रेरित होकर मॉडलिंग सीखी है। अब उनका अगला लक्ष्य मिस इंडिया और मिस यूनिवर्स का खिताब जीतना है, जिसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रही हैं।

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