सुक्खू सरकार पर पंचायत व नगर निकाय चुनाव में दखलअंदाजी का आरोप, राज्यपाल से मिला BJP प्रतिनिधिमंडल; हस्तक्षेप की मांग

Edited By Swati Sharma, Updated: 25 May, 2026 05:55 PM

himachal government accused of violating the code of conduct

HP Panchayat Election : हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस सरकार की कथित दखलअंदाजी को लेकर चिंता जताते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को...

HP Panchayat Election : हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस सरकार की कथित दखलअंदाजी को लेकर चिंता जताते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राज्यपाल कवींद्र गुप्ता से मुलाकात की और इस मामले में उनके हस्तक्षेप की मांग की।

राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खु के नेतृत्व वाली राज्य सरकार चुनाव में हार का आभास होने के बाद लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हेरफेर करने, नियमों में संशोधन करने और जनादेश को प्रशासनिक एवं राजनीतिक दबाव के माध्यम से प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। हिमाचल प्रदेश में 51 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव के लिए मतदान 17 मार्च को हुआ, जबकि 3,754 ग्राम पंचायतों में वोट तीन चरणों में 26, 28 और 30 मई को डाले जाएंगे। विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और अन्य पदाधिकारियों के साथ बैठक में मौजूद थे।

बिंदल ने लगाया ये आरोप

बिंदल ने संवाददाताओं से कहा कि भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने ''हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा'' के लिए राज्यपाल से संपर्क किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण संबंधी प्रावधानों में संशोधन और नगर परिषदों एवं नगर पंचायतों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के चुनाव को नियंत्रित करने वाले नियमों में बदलाव का उद्देश्य अधिकारियों को अत्यधिक विवेकाधीन शक्तियां देना और कांग्रेस नेताओं को पर्दे के पीछे के राजनीतिक प्रभाव के माध्यम से परोक्ष तौर पर लाभ पहुंचाना है। बिंदल ने कहा कि हार के डर से कांग्रेस कई जगहों पर आधिकारिक तौर पर उम्मीदवारों को नामांकित करने में विफल रही। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने पहले पंचायत चुनावों में देरी करने की कोशिश की थी, लेकिन वह उच्च न्यायालय और शीर्ष अदालत दोनों में असफल रही और अब उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के कारण ही चुनाव कराए जा रहे हैं।

आदर्श आचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन करने का आरोप

जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुक्खू पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में आयोजित रैलियों के दौरान वित्तीय प्रोत्साहन और विकास निधि की घोषणा करके आदर्श आचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए 50 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक की घोषणाएं सार्वजनिक रूप से की गईं, जो चुनाव नियमों का सीधा उल्लंघन है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थित समूहों का समर्थन नहीं करने पर निर्वाचित प्रतिनिधियों को सतर्कता जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि आचार संहिता लागू होने के दौरान कैबिनेट की ओर से लिए गए फैसले, जिनमें वित्तीय सहायता योजनाओं और मानदेय वृद्धि से संबंधित घोषणाएं शामिल हैं, मतदाताओं और निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावित करने के उद्देश्य से लिए गए थे। भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से हस्तक्षेप करने और हिमाचल प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक प्रक्रियाओं और जनादेश की शुचिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

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