Edited By Vijay, Updated: 05 Sep, 2026 12:55 PM

हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सड़क सुरक्षा और बेसहारा पशुओं के संरक्षण के दावे जमीनी स्तर पर नाकाम साबित हो रहे हैं।
मंडी (रजनीश हिमालयन): हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सड़क सुरक्षा और बेसहारा पशुओं के संरक्षण के दावे जमीनी स्तर पर नाकाम साबित हो रहे हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा बिलासपुर जिले में टीहरा टनल के समीप करोड़ों की लागत से बनाया गया देश का पहला गोकुल धाम हाईवे पर विचरते बेसहारा पशुओं को रोकने में फिलहाल असफल नजर आ रहा है। आलम यह है कि सुरक्षित आश्रय स्थल होने के बावजूद बेसहारा पशुओं का हुजूम सड़क के बीचोंबीच बैठा रहता है, जिससे हर समय बड़े हादसों की आशंका बनी रहती है।
अत्याधुनिक सुविधाओं के बावजूद सड़क पर बेसहारा पशु
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने गाबर कंपनी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत टीहरा टनल के पास इस गोकुल धाम को विकसित किया था। यह केंद्र आधुनिक सुविधाओं से लैस है, जिसमें एक साथ 100 से अधिक पशुओं को रखने की क्षमता है। परिसर के भीतर ही एक अत्याधुनिक डिस्पैंसरी है, जहां पशुओं की देखभाल के लिए 24 घंटे डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ तैनात रहते हैं। इन बेहतरीन सुविधाओं के बावजूद भगेड़ से टीहरा टनल की ओर जाने वाले मार्ग पर डिवाइडरों और सड़क के बीच बेसहारा पशुओं का भारी जमावड़ा आसानी से देखा जा सकता है।
रेडियम बैल्ट के दावे निकले कागजी, वाहन चालकों की जान सांसत में
हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों के बीच इन बेसहारा पशुओं की मौजूदगी दुर्घटनाओं को न्यौता दे रही है, विशेषकर रात के समय स्थिति जानलेवा हो जाती है। हादसों पर लगाम कसने के लिए एनएचएआई ने पूर्व में घोषणा की थी कि फोरलेन पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं के गले में रेडियम बैल्ट और सींगों पर रेडियम टेप लगाई जाएगी, ताकि रात के अंधेरे में वे दूर से चमकें। हालांकि, वर्तमान में किसी भी पशु पर रेडियम बैल्ट या टेप नजर नहीं आ रही है, जिससे यह योजना केवल बयानों तक सीमित होकर रह गई है।
क्या कहता है एनएचएआई प्रबंधन?
इस पूरे मसले पर एनएचएआई के परियोजना निदेशक वरुण चारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि गोकुल धाम में मुख्य रूप से उन पशुओं को रखा जाता है जो बीमार हैं या किसी वाहन की टक्कर से घायल हुए हैं। क्षमता को बढ़ाने के लिए गोकुल धाम के साथ वन विभाग की भूमि पर एक अतिरिक्त शैड बनाने के लिए डीसी बिलासपुर से बात की गई है और जल्द ही इस पर दोबारा चर्चा होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित टीम को मौके का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि गोकुल धाम में जगह उपलब्ध होगी, तो फोरलेन पर मौजूद बेसहारा पशुओं को वहां शिफ्ट किया जाएगा।
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