Edited By Vijay, Updated: 23 Oct, 2026 07:34 PM

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दावा किया है कि वर्ष 2030 तक प्रदेश स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में देश में पहले पायदान पर होगा।
शिमला (कुलदीप): हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दावा किया है कि वर्ष 2030 तक प्रदेश स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में देश में पहले पायदान पर होगा। राज्य सचिवालय में आयोजित एक विशेष पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार ने पांच प्रमुख बिंदुओं को अपना लक्ष्य माना है। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सुधार शामिल हैं, जिन पर प्राथमिकता के आधार पर काम किया जा रहा है।
अस्पतालों में एम्स स्तर की मशीनें और जीरो वेटिंग का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के तहत राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। मरीजों की सुविधा के लिए अस्पतालों में पुरानी एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों को हटाकर एम्स के स्तर की आधुनिक मशीनरी स्थापित की गई है। सरकार का मुख्य लक्ष्य अस्पतालों में मेडिकल टेस्ट और डायग्नोस्टिक्स के लिए जीरो वेटिंग (मरीजों को इंतजार न करना पड़े) सुनिश्चित करना है। आधुनिक मशीनों से बीमारियों की पहचान समय पर होगी, जिससे मरीजों का उपचार शीघ्र होगा और उनके पैसे की भी बचत होगी।
30 हजार में हो रही रोबोटिक सर्जरी
स्वास्थ्य क्षेत्र में मिली बड़ी उपलब्धि का जिक्र करते हुए सीएम सुक्खू ने बताया कि प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी सुविधा शुरू कर दी गई है। इसके जरिए अब तक 600 से अधिक सफल ऑप्रेशन किए जा चुके हैं। सबसे खास बात यह है कि जिस रोबोटिक सर्जरी की वास्तविक लागत लगभग 1.20 लाख रुपए आती है, वह प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में मात्र 30 हजार रुपए में की जा रही है।
2027 तक 70 फीसदी होगा मेडिकल स्टाफ, पीजी सीटें भी बढ़ीं
पिछली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भाजपा सत्ता से बाहर हुई, तब मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल और पैरा-मेडिकल स्टाफ केवल 35 फीसदी था। वर्तमान सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक इस आंकड़े को 70 फीसदी तक पहुंचाना है। अस्पतालों में अब डॉक्टरों की तैनाती 60 फीसदी तक पहुंच गई है। इसके अलावा, करीब 40 वर्षों के बाद मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों में 320 की ऐतिहासिक बढ़ौतरी की गई है, जिससे अब यह संख्या बढ़कर 597 हो गई है। रेडियोग्राफर्स की कमी को भी पहले बैच के पासआऊट होने के साथ ही दूर कर लिया जाएगा।
डॉक्टरों का भत्ता हुआ डबल, ड्यूटी का समय घटाया
सरकार ने चिकित्सा बिरादरी को बड़ी राहत देते हुए सीनियर रेजिडेंटशिप की राशि को 65 हजार रुपए से बढ़ाकर सीधे 1.30 लाख रुपए कर दिया है। इसके साथ ही उनकी ड्यूटी के घंटे 48 से घटाकर 12 घंटे किए गए हैं। प्रशासनिक और चिकित्सीय कामकाज को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने डीएचएस और डीएमई कैडर को भी अलग कर दिया है।
आर्थिक चुनौतियों के बावजूद जुटाई 4,000 करोड़ की आय
आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपने शेष कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश को आर्थिक दृष्टि से पूरी तरह मजबूत बनाएगी। उन्होंने दावा किया कि तमाम आर्थिक चुनौतियों और संकटों के बावजूद सरकार ने अपने अब तक के कार्यकाल में लगभग 4,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय जुटाई है। व्यवस्था परिवर्तन और नई नीतियों के कारण आबकारी क्षेत्र से प्राप्त होने वाले राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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