हिमाचल के युवाओं को निगल रहा है 'चिट्टा', 3 साल में 66 मौतें...

Edited By Jyoti M, Updated: 24 Mar, 2026 05:43 PM

chitta  is devouring himachal s youth 66 deaths in 3 years

हिमाचल प्रदेश, जिसे अपनी शांत वादियों और शुद्ध हवा के लिए जाना जाता है, आज एक अदृश्य दुश्मन की गिरफ्त में है। प्रदेश में नशे का जाल इस कदर फैल चुका है कि अब यह केवल परिवारों को ही नहीं, बल्कि युवाओं की जिंदगी को भी निगल रहा है।

हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश, जिसे अपनी शांत वादियों और शुद्ध हवा के लिए जाना जाता है, आज एक अदृश्य दुश्मन की गिरफ्त में है। प्रदेश में नशे का जाल इस कदर फैल चुका है कि अब यह केवल परिवारों को ही नहीं, बल्कि युवाओं की जिंदगी को भी निगल रहा है। हाल ही में विधानसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों (2023 से जनवरी 2026 तक) में ड्रग्स की ओवरडोज के कारण 66 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। विधायक जीत राम कटवाल और प्रकाश राणा द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने नशे के इस खौफनाक चेहरे को उजागर किया है।

मौत का ग्राफ और कानूनी कार्रवाई

पिछले कुछ सालों में ओवरडोज से होने वाली मौतों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है:

2023: 8 मौतें

2024: 31 मौतें

2025: 27 मौतें

कानूनी मोर्चे पर नजर डालें तो इस दौरान ड्रग्स से जुड़े कुल 6,246 मामले दर्ज किए गए। हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए 5,684 मामलों में चार्जशीट दाखिल की है, लेकिन सजा की दर अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। अब तक केवल 108 मामलों में दोषियों को सजा मिली है, जबकि 139 आरोपी बरी हो चुके हैं।

अदालतों में लंबित मामलों का अंबार

नशे के खिलाफ लड़ाई की गति को न्यायिक प्रक्रिया की सुस्ती प्रभावित कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक 5,437 मामले फिलहाल अदालतों में फैसले का इंतजार कर रहे हैं। 486 मामलों में अभी जांच (इन्वेस्टिगेशन) जारी है।
कुछ मामलों में सबूतों के अभाव के कारण पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट भी फाइल की है।

"चिट्टा" और जमानत की कानूनी पेचीदगी

हिमाचल में 'चिट्टा' (सिंथेटिक ड्रग) सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि कानूनी तकनीकी बाधाओं के कारण कई बार आरोपी बच निकलते हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार 5 ग्राम से कम इसे छोटी मात्रा माना जाता है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और बीएनएस की धारा 35(3) के तहत आरोपी को जमानत मिल जाती है।

5 ग्राम से 250 ग्राम (इंटरमीडिएट) और 250 ग्राम से अधिक (कमर्शियल) मात्रा मिलने पर ही कड़ी शर्तों के साथ जेल का प्रावधान है। यही कारण है कि पिछले 3 वर्षों में करीब 5,298 आरोपी जमानत पाने में सफल रहे हैं।

सरकार का 'एंटी-ड्रग' ब्लूप्रिंट

नशे के सौदागरों पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने अब बहुआयामी रणनीति अपनाई है। नशा तस्करों द्वारा अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों को जब्त किया जा रहा है।

'नशामुक्त हिमाचल' ऐप और टोल-फ्री नंबर 112 के जरिए जनता से सहयोग मांगा जा रहा है। केमिस्ट की दुकानों का औचक निरीक्षण और थानों में ड्रग पैडलर्स के लिए अलग से 'निगरानी रजिस्टर' तैयार किए गए हैं। पीड़ितों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए 'दिशा केंद्रों' और सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!