Himachal: मां चिंतपूर्णी के दरबार में बड़ा गुप्त दान, मुराद पूरी होने पर श्रद्धालु ने अर्पित किया 11 तोले सोने का छत्र

Edited By Vijay, Updated: 04 Apr, 2026 02:25 PM

chintpurni temple

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित उत्तर भारत के विश्व विख्यात शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी के दरबार में आस्था और भक्ति का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला।

चिंतपूर्णी: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित उत्तर भारत के विश्व विख्यात शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी के दरबार में आस्था और भक्ति का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। पंजाब से आए एक श्रद्धालु ने माता के चरणों में अपनी असीम श्रद्धा प्रकट करते हुए 11 तोले सोने का एक बेहद सुंदर छत्र अर्पित किया है। बताया जा रहा है कि इस श्रद्धालु ने माता रानी से कोई विशेष मन्नत मांगी थी। अपनी उस मुराद के पूरा होने की अपार खुशी में भक्त ने सपरिवार दरबार में पहुंचकर यह बेशकीमती भेंट माता को समर्पित की है।

पहचान छुपाकर पेश की गुप्त दान की मिसाल
इस बहुमूल्य भेंट की सबसे खास बात यह रही कि श्रद्धालु ने इसे पूरी तरह से गुप्त दान के रूप में किया है। जानकारी के अनुसार यह श्रद्धालु अपने पूरे परिवार के साथ माता के दरबार में पहुंचा था। उन्होंने सबसे पहले पवित्र गर्भगृह में जाकर माता की पावन पिंडी के दर्शन किए, शीश नवाया और विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की। इसके उपरांत उन्होंने 11 तोले सोने का यह छत्र मंदिर प्रशासन के अधिकारियों को सौंप दिया। दानकर्ता ने मंदिर प्रशासन से विशेष तौर पर आग्रह किया कि उनका और उनके परिवार का नाम या पहचान किसी भी रूप में सार्वजनिक न की जाए। बिना किसी दिखावे के किया गया यह दान सच्चे भक्तों की नि:स्वार्थ भक्ति को दर्शाता है।

51 शक्तिपीठों में से एक है चिंतपूर्णी दरबार
गौरतलब है कि माता श्री चिंतपूर्णी का यह पावन धाम हिंदू धर्म के पवित्र 51 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख स्थान रखता है। पौराणिक मान्यताओं और धर्म ग्रंथों के अनुसार माता सती का जब आत्मदाह हुआ था, तो भगवान शिव उनके शरीर को लेकर ब्रह्मांड में विचरण कर रहे थे। उस समय भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंग काटे थे। मान्यता है कि इसी पवित्र स्थान पर माता सती के चरण गिरे थे, जिसके बाद यह स्थान एक महान शक्तिपीठ के रूप में विख्यात हुआ।

चिंताओं को हरने वाली माता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भी भक्त सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ माता के दरबार में आकर प्रार्थना करता है, मां उसकी सभी चिंताओं को हर लेती हैं। इसी कारण इस धाम को चिंतपूर्णी (चिंताओं को पूर्णतः समाप्त करने वाली) कहा जाता है। हर साल देश के विभिन्न राज्यों खासकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली के साथ-साथ विदेशों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता का आशीर्वाद लेने इस शक्तिपीठ में पहुंचते हैं। मन्नतें और मुरादें पूरी होने पर भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार माता के दरबार में सोना, चांदी, नकद और अन्य बहुमूल्य आभूषण भेंट स्वरूप अर्पित करते हैं। 11 तोले सोने के इस गुप्त दान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मां के प्रति भक्तों की अटूट आस्था और विश्वास आज भी कितना गहरा है।

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