Kangra: टांडा मैडीकल कॉलेज में स्टंट खरीद अनियमितताओं के आरोपों की जांच हुई तेज

Edited By Kuldeep, Updated: 20 Aug, 2026 08:56 PM

shimla tanda medical college

डा. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मैडीकल कॉलेज (टांडा) के कार्डियोलॉजी विभाग में सामने आए कथित स्टंट घोटाले के मामले में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन ने अब शिकंजा कस दिया है।

शिमला (ब्यूरो): डा. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मैडीकल कॉलेज (टांडा) के कार्डियोलॉजी विभाग में सामने आए कथित स्टंट घोटाले के मामले में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन ने अब शिकंजा कस दिया है। 74 फीसदी सस्ते एल-1 टैंडर को दरकिनार कर, रिजैक्टिड कंपनियों के महंगे स्टंट मरीजों को लगाए जाने के मामले में चल रही उच्च स्तरीय जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। असंतोषजनक जवाब के बाद कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इस पूरे नैक्सस को जड़ से बेनकाब करने के लिए जांच का दायरा विस्तृत कर दिया गया है। इस मामले की जांच का जिम्मा आईजीएमसी शिमला की प्राचार्य डा. सीता ठाकुर की अगुवाई वाली टीम कर रही है, जो रिकार्ड को खंगालने में जुट गई है।

जांच समिति ने कार्डियोलॉजी विभाग की पिछली सभी प्रकार की खरीद, टैंडर दस्तावेजों और बिलिंग रिकॉर्ड्स को कब्जे में ले लिया है। अब यह बारीकी से पता लगाया जा रहा है कि रिजैक्ट होने के बावजूद अयोग्य कंपनियों के स्टंट इन्वैंट्री रूम तक कैसे पहुंचे और इनके बिलों का भुगतान किस स्तर पर पास किया गया।विवादित अवधि के दौरान स्टंट लगवाने वाले सभी हृदय रोगियों की मैडीकल फाइलें खंगाली जा रही हैं। जांच दल यह सुनिश्चित कर रहा है कि मरीजों से कितनी रकम वसूली गई और क्या हिमकेयर या आयुष्मान जैसी सरकारी कैशलैस योजनाओं के तहत भी इन महंगे और अयोग्य स्टंट का क्लेम उठाया गया था।

अब केवल विभागीय जांच ही नहीं हो रही है, बल्कि इस बात की गहन पड़ताल की जा रही है कि इस खरीद के पीछे किसी बड़े कमीशन या आर्थिक लाभ का लेन-देन तो नहीं हुआ। अयोग्य कंपनियों के प्रतिनिधियों और अस्पताल के संबंधित स्टाफ की कॉल डिटेल्स व मुलाकातों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य निदेशालय स्तर पर उन सप्लायर कंपनियों को हिमाचल प्रदेश में ब्लैकलिस्ट में डालने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिन्होंने टैंडर में रिजैक्ट होने के बावजूद गैर-कानूनी तरीके से पिछले दरवाजे से उपकरणों की सप्लाई की।

राज्य सरकार और स्वास्थ्य मुख्यालय शिमला ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में लगाए गए आरोप पूरी तरह से सिद्ध हो जाते हैं, तो संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ निलंबन और पुलिस में एफआईआर जैसी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई तुरंत अमल में लाई जाएगी। भविष्य में राज्य के सभी मैडीकल कॉलेजों के लिए मैडीकल उपकरणों की खरीद को पूरी तरह से केंद्रीकृत और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार एक नई सख्त एसओपी भी तैयार कर रही है।

जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा : डा. सीता ठाकुर
टांडा मैडीकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग में उपकरणों की खरीद में हुई अनियमितताओं की जांच कर रही उच्च स्तरीय टीम में शामिल आई.जी.एम.सी. शिमला की प्राचार्या डा. सीता ठाकुर ने बताया कि अभी इसकी इन्क्वायरी शुरू ही हुई है और रिकार्ड को खंगाला जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

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