Shimla: पंचायत चुनावों में सीटें आरक्षित करने को DC को दी गई शक्तियों पर हाईकोर्ट की रोक

Edited By Kuldeep, Updated: 06 Apr, 2026 07:38 PM

shimla panchayat elections roster

हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों में जिलाधीशों को भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार 5 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने को लेकर दी गई शक्तियों पर रोक लगा दी है।

7 अप्रैल को रोस्टर जारी करने के आदेश
शिमला (मनोहर):
हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों में जिलाधीशों को भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार 5 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने को लेकर दी गई शक्तियों पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने यह रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि यदि इन शक्तियों का इस्तेमाल कर संबंधित जिलाधीशों ने यदि कोई आरक्षण रोस्टर जारी किया है तो उस आरक्षण रोस्टर पर भी रोक रहेगी। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया में जिलाधीशों की इन शक्तियों को संविधान के विपरीत ठहराते हुए इन्हें गैर कानूनी बताया। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि लगभग सभी पंचायती राज संस्थाओं का आरक्षण रोस्टर जारी किया जा चुका है। सरकार द्वारा चुनाव नियम बनाने की सरकार की शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह शक्तियां जिलाधीशों को दी गई हैं।

याचिकाकर्त्ताओं का कहना था कि यह शक्तियां संविधान के खिलाफ होने के कारण असंवैधानिक हैं क्योंकि संविधान में भौगोलिक आधार पर आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं दी गई है। कोर्ट ने प्रार्थियों की दलीलों से सहमति जताते हुए सरकार द्वारा 30 मार्च को दी गई उपरोक्त शक्तियों पर रोक लगाने के आदेश दिए। इन आदेशों के बाद अब सिर्फ उन्हीं चुनाव क्षेत्रों के लिए फिर से आरक्षण रोस्टर जारी करने को कहा गया है जहां डी.सी. ने इस शक्ति का उपयोग किया है। कोर्ट ने 7 अप्रैल शाम 5 बजे तक उन क्षेत्रों का रोस्टर फिर से जारी करने के आदेश दिए हैं, जहां भौगोलिक आधार पर आरक्षण रोस्टर जारी किया गया है।

याचिकाकर्त्ता ग्राम पंचायत घोड़ना तहसील ठियोग जिला शिमला के पूर्व प्रधान विकेश जिंटा व अन्यों द्वारा दायर याचिका में सरकार द्वारा 5 प्रतिशत सीटों पर जिलाधीशों को दी गई आरक्षण रोस्टर बदलने की शक्ति को चुनौती दी गई है। सुबह इस मामले पर मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी.सी. नेगी की खंडपीठ के समक्ष इस जनहित याचिका पर सुनवाई हुई और इस खंडपीठ ने सरकार की अधिसूचनाओं को असंवैधानिक ठहराने को लेकर दायर मामलों की सुनवाई करने वाली खंडपीठ को भेज दिया था।

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