Edited By Kuldeep, Updated: 02 Nov, 2026 09:16 PM

प्रदेश उच्च न्यायालय ने सड़क दुर्घटना दावों से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि लर्निंग लाइसैंस भी कानूनन एक वैध ड्राइविंग लाइसैंस है।
शिमला (मनोहर): प्रदेश उच्च न्यायालय ने सड़क दुर्घटना दावों से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि लर्निंग लाइसैंस भी कानूनन एक वैध ड्राइविंग लाइसैंस है। इसके आधार पर बीमा कंपनी अपनी मुआवजा देने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। न्यायाधीश विरेंद्र सिंह ने ओरिएंटल इंश्योरैंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए मुआवजे की राशि को 33,97,440 रुपए से बढ़ाकर 34,03,030 रुपए कर दिया और इसकी पूरी देनदारी बीमा कंपनी पर बरकरार रखी।
बीमा कंपनी का मुख्य तर्क था कि दुर्घटना के समय मोटरसाइकिल चालक के पास केवल लर्निंग लाइसैंस था और उसने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन किया था, इसलिए यह बीमा पॉलिसी का मूल उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि लर्निंग लाइसैंस धारक को 'वैध लाइसैंस रहित' नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 24(3)(v) का बारीकी से विश्लेषण करते हुए स्पष्ट किया कि मोटरसाइकिल को दोहरे नियंत्रण वाले इंस्ट्रक्टर की अनिवार्य मौजूदगी से छूट प्राप्त है।