Kullu: देवता मार्कंडेय ऋषि ने किया शाही स्नान, धरती माता का दूध पीने की रस्म निभाई

Edited By Kuldeep, Updated: 14 Apr, 2026 06:06 PM

nagwain deity markandeya rishi royal bath

मंडी और कुल्लू जिले की सीमा पर स्थित नगवाईं के समीप मकराहड़ में मंगलवार को श्रद्धा और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला।

नगवाईं (कुल्लू) (संजीव): मंडी और कुल्लू जिले की सीमा पर स्थित नगवाईं के समीप मकराहड़ में मंगलवार को श्रद्धा और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। गड़सा घाटी के अधिष्ठाता देवता मार्कंडेय ऋषि थरास ने हजारों देवलुओं और भक्तों की उपस्थिति में ब्यास व गोमती नदी के पवित्र संगम पर शाही स्नान किया। यह अवसर देवता के प्राकट्य दिवस के रूप में धूमधाम से मनाया गया, जिसमें कुल्लू, बंजार और मंडी सराज के हजारों श्रद्धालुओं ने शिरकत की।

मंगलवार सुबह करीब 11 बजे देवता थरास अपने लाव-लश्कर के साथ मकराहड़ पहुंचे। परंपरा के अनुसार देवता के कारकून संगम की ओर उलटे पैर चलते हुए देवता की अगवानी कर रहे थे। ब्यास और गोमती नदी के तट पर पहुंचते ही समूचा वातावरण ऋषि मार्कंडेय के जयघोष से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालुओं ने देवता के साथ नदी के शीतल जल में डुबकी लगाई। लोक मान्यता है कि इस विशेष दिन यहां स्नान करने से असाध्य चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है। स्नान के पश्चात श्रद्धालु पवित्र जल को बोतलों में भरकर अपने घर ले गए, जिसे वे साल भर शुद्धिकरण के लिए प्रयोग करते हैं।

धरती माता का स्तनपान : एक भावुक दृश्य
इस उत्सव का सबसे मुख्य आकर्षण धरती माता का दूध पीने की रस्म रही। शाही स्नान के बाद देवरथ उस खेत में पहुंचा, जहां सदियों पहले एक महिला को हल जोतते समय देवता का मुखौटा मिला था। जैसे ही देवता उस स्थान पर पहुंचे तो वातावरण आध्यात्मिक हो गया। मान्यता है कि इस क्षण धरती फट जाती है और माता अपने बालक रूपी ऋषि को गोद में लेकर दुलार करती है।

देवरथ 3 बार धरती माता का स्पर्श करता रहा और स्तनपान की रस्म निभाई। इस अलौकिक घटना को देखने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह रस्म प्रकृति व ईश्वर के अटूट प्रेम का प्रतीक है।

शैतानों को पत्थर मारने की परंपरा
स्नान से पूर्व एक अन्य प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया गया, जिसे शैतानों को पत्थर मारना कहा जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत और क्षेत्र से नकारात्मक शक्तियों को भगाने के प्रतीक स्वरूप सांकेतिक रूप से निभाई गई। इसके बाद ही देवता संगम की ओर बढ़े।

भविष्यवाणी और सुख-शांति का संदेश
मंदिर परिसर पहुंचने पर देवता के गुर ने खेल के माध्यम से आगामी वर्ष के लिए भविष्यवाणी की। उन्होंने सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देते हुए लोगों को सचेत रहने व धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। देवता के कारदार जीवन प्रकाश ने मंडी, कुल्लू व सराज से आए विभिन्न देवी-देवताओं के कारकूनों और मेहमानों का स्वागत किया।

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