Edited By Vijay, Updated: 18 Jul, 2026 11:46 AM

हिमाचल प्रदेश के चर्चित 500 करोड़ रुपए से अधिक के क्रिप्टो करंसी निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए 3 लाेगों को गिरफ्तार किया है। इनमें मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा शामिल हैं।
शिमला (राक्टा): हिमाचल प्रदेश के चर्चित 500 करोड़ रुपए से अधिक के क्रिप्टो करंसी निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए 3 लाेगों को गिरफ्तार किया है। इनमें मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा शामिल हैं। धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत आरोपियों को हिरासत में लेकर विशेष पीएमएलए अदालत शिमला में पेश किया, जहां से अदालत ने तीनों को 12 दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है। ईडी की जांच हिमाचल प्रदेश और पंजाब में दर्ज मामलों के आधार पर चल रही है। जांच एजैंसी के अनुसार आरोपियों ने कोर्वियो, डीजीटी, हाइपनैक्स्ट और ए-ग्लोबल जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार कर लोगों को कम समय में अधिक मुनाफे का भरोसा दिलाया और बड़े पैमाने पर निवेश जुटाया।
2.48 लाख से अधिक लोगों को क्रिप्टो निवेश के नाम पर जोड़ा
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2018 से संचालित इस कथित नैटवर्क के माध्यम से 2.48 लाख से अधिक लोगों को क्रिप्टो निवेश के नाम पर जोड़ा गया। निवेशकों को शुरूआती दौर में रिटर्न देकर भरोसा कायम रखा गया, जबकि बाद में नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान कर पोंजी मॉडल के जरिए पूरे नैटवर्क को चलाया गया। ईडी के अनुसार इस घोटाले में 219 मिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक के वित्तीय लेन-देन हुए और निवेशकों को करीब 500 करोड़ रुपए का नुक्सान हुआ। जांच एजैंसी का दावा है कि मिलन गर्ग इस नैटवर्क की तकनीकी गतिविधियों का प्रमुख संचालक था। उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किए, उन्हें विदेशी सर्वरों पर संचालित किया, क्रिप्टो वॉलेट्स का प्रबंधन किया और निवेशकों की राशि को विभिन्न माध्यमों से ट्रांसफर करने की व्यवस्था संभाली।
सुखदेव और अभिषेक की भूमिका भी अहम
ईडी के अनुसार सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा शुरूआती प्रमोटरों में शामिल थे। दोनों ने लोगों को ऊंचे मुनाफे का लालच देकर निवेश करवाया, बड़ी मात्रा में नकदी एकत्र की और उसे मुख्य साजिशकर्त्ताओं तक पहुंचाया। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों ने इस कथित घोटाले से कमीशन कमाया और अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई संपत्तियों में लाभकारी हिस्सेदारी हासिल की।
मुख्य आरोपी अब भी फरार
इस मामले में हेमराज और मासूम जुनेजा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं पूरे नैटवर्क का कथित मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है। ईडी अब इस मामले में धन के प्रवाह, विदेशों तक पहुंचे निवेश, क्रिप्टो वॉलेट्स और अपराध से अर्जित संपत्तियों की गहन जांच कर रही है। एजैंसी का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में कई और अहम खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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