हिमाचल सरकार का बड़ा एक्शन: छात्राओं से छेड़छाड़ करने वाले 3 प्रोफेसर बर्खास्त

Edited By Jyoti M, Updated: 16 Apr, 2026 05:26 PM

himachal 3 professors sacked for molesting girl students

हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने महिला सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश के अलग-अलग कॉलेजों में तैनात तीन असिस्टेंट प्रोफेसरों को नौकरी से निकाल दिया है। इन प्रोफेसरों पर अपनी ही छात्राओं के साथ छेड़छाड़, मानसिक उत्पीड़न और यौन शोषण की...

हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने महिला सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश के अलग-अलग कॉलेजों में तैनात तीन असिस्टेंट प्रोफेसरों को नौकरी से निकाल दिया है। इन प्रोफेसरों पर अपनी ही छात्राओं के साथ छेड़छाड़, मानसिक उत्पीड़न और यौन शोषण की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगे थे। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी किए।

हमीरपुर जिले के गवर्नमेंट कॉलेज, नादौन में तैनात केमिस्ट्री के असिस्टेंट प्रोफेसर अनिल कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है। घटना नवंबर 2024 की है, जब केमिस्ट्री प्रैक्टिकल के दौरान प्रोफेसर ने प्रथम वर्ष की छात्रा के साथ लैब में बार-बार अश्लील हरकतें की थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने उन्हें सेवा से मुक्त करने का फैसला लिया।

शिमला के राजकीय महाविद्यालय (चौड़ा मैदान) का एक पुराना मामला भी इस कार्रवाई की जद में आया है। गणित विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने 2021 में एक छात्रा पर मेल-जोल बढ़ाने का दबाव डाला और उसे कार में बैठाकर अपने घर ले गए, जहाँ उन्होंने दुष्कर्म का प्रयास किया। छात्रा की शिकायत और जांच के बाद अब उन्हें विभाग से बाहर कर दिया गया है।

तीसरा मामला शिमला के कॉलेज से जुड़ा है, जहाँ डांस (कथक) के असिस्टेंट प्रोफेसर पवन कुमार पर एक छात्रा ने यौन उत्पीड़न और बंधक बनाकर दुष्कर्म की कोशिश का आरोप लगाया था। छात्रा के अनुसार, आरोपी उसे महीनों से परेशान कर रहा था। आरोपी शिक्षक फिलहाल धर्मशाला के एक कॉलेज में तैनात था, लेकिन अब उसे भी नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।

विभागीय कार्रवाई और कड़ा संदेश

शिक्षा सचिव ने स्पष्ट किया कि इन तीनों प्रोफेसरों के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा (CCS) नियम, 1965 के तहत विभागीय अनुशासनात्मक जांच पूरी होने के बाद यह कड़ी कार्रवाई की गई है। सरकार का यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि शिक्षण संस्थानों में छात्राओं के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार सहन नहीं किया जाएगा।

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