Himachal : पूर्व विधायक की कार को टक्कर मारने के मामले में आरोपी बरी, पुलिस जांच पर उठे गंभीर सवाल

Edited By Swati Sharma, Updated: 29 Jun, 2026 06:40 PM

himachal  accused acquitted in case of hitting former mla car

Mandi News : हिमाचल प्रदेश के मंडी में शराब के नशे में अपनी कार से दो वाहनों को टक्कर मारने के आरोपी नरेश कुमार को अतिरिक्त सत्र अदालत ने सोमवार को बरी कर दिया। इनमें से एक वाहन में सुंदरनगर के पूर्व विधायक सोलन लाल ठाकुर सवार थे। अतिरिक्त सत्र...

Mandi News : हिमाचल प्रदेश के मंडी में शराब के नशे में अपनी कार से दो वाहनों को टक्कर मारने के आरोपी नरेश कुमार को अतिरिक्त सत्र अदालत ने सोमवार को बरी कर दिया। इनमें से एक वाहन में सुंदरनगर के पूर्व विधायक सोलन लाल ठाकुर सवार थे। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश होशियार सिंह वर्मा ने आरोपी की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए साक्ष्यों के अभाव का हवाला दिया और निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को निरस्त कर दिया।

क्या है मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 31 मई, 2016 को रात करीब 10:45 बजे सुंदरनगर के निकट कंगू में हुई थी, जब नरेश कुमार द्वारा कथित रूप तौर पर चलाई जा रही कार ने दो वाहनों को टक्कर मार दी थी। पूर्व विधायक सोहन लाल ठाकुर उस समय अपने चालक धर्मेंद्र और पुलिस सुरक्षा अधिकारी प्रकाश चंद के साथ एक वाहन में सवार थे। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने 15 अक्टूबर, 2023 को नरेश कुमार को तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाना) और धारा 337 (लापरवाही से चोट पहुंचाना) के तहत छह महीने के कारावास तथा एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके अलावा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 (खतरनाक ढंग से वाहन चलाना) के तहत भी उस पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। अतिरिक्त सत्र अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस ने मुकदमे के दौरान जानबूझकर महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि दुर्घटना के समय वाहन केवल नरेश कुमार ही चला रहा था।

जांच में यह सामने आया है कि कार में तीन अन्य लोग भी मौजूद थे और यह निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं किया जा सका कि दुर्घटना के समय वाहन कौन चला रहा था। अदालत ने कहा कि पुलिस ने जांच के दौरान यह स्पष्ट नहीं किया कि पूर्व विधायक वाले वाहन में कौन-कौन सवार था और न ही सोहन लाल ठाकुर को गवाह के रूप में पेश किया गया। अपील पर सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि निचली अदालत ने साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया। इसलिए दोषसिद्धि कानून की दृष्टि में टिकाऊ नहीं है और इसी आधार पर नरेश कुमार को आरोपों से बरी कर दिया गया। 

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