Edited By Swati Sharma, Updated: 01 Sep, 2026 10:36 AM

देश की आज़ादी के लगभग आठ दशक बाद भी, सोलन निर्वाचन क्षेत्र की धारोट ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले आंजी गांव के निवासी आज भी पुराने जमाने की स्थितियों में जीने को मजबूर हैं। हाई-प्रोफाइल सोलन जिले में होने के बावजूद, इस छोटे से गांव में गाड़ियों के...
Solan News : देश की आज़ादी के लगभग आठ दशक बाद भी, सोलन निर्वाचन क्षेत्र की धारोट ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले आंजी गांव के निवासी आज भी पुराने जमाने की स्थितियों में जीने को मजबूर हैं। हाई-प्रोफाइल सोलन जिले में होने के बावजूद, इस छोटे से गांव में गाड़ियों के चलने लायक बुनियादी सड़क संपर्क नहीं है। इस वजह से ग्रामीणों को सबसे नजदीकी मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर एक घंटे की मुश्किल पैदल यात्रा करनी पड़ती है।
समय के साथ एक दौड़ बन जाती है हर आपातकालीन चिकित्सा
इस व्यवस्थागत लापरवाही का मानवीय असर इस हफ़्ते तब साफ तौर पर सामने आया, जब एक गंभीर रूप से बीमार महिला को सात-आठ लोगों ने अपने कंधों पर उठाकर सुरक्षित जगह पहुंचाया। गांव वाले खड़ी और ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों से होते हुए उसे मुख्य राजमार्ग तक ले गए, जहां पहले से मौजूद एक गाड़ी उसे अस्पताल ले गई। एक ग्रामीण ने कहा कि हर चिकित्सा आपातकालीन समय के साथ एक दौड़ बन जाती है।' उसने आगे कहा, 'अगर यहां पक्की सड़क होती, तो वह कुछ ही मिनटों में चिकित्सा मदद तक पहुंच सकती थीं। यहां तो जिंदा रहने के लिए भी बहुत ज्यादा शारीरिक सहनशक्ति की ज़रूरत होती है।' आंजी गांव के बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं और स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण रोजमरा की जिंदगी एक थका देने वाली मुश्किल बन जाती है। रोजमरा की जरूरी चीजें, निर्माण का सामान और खेती से हुई उपज इन सभी को पैदल ही ले जाना पड़ता है। खराब मौसम में, पैदल चलने का कच्चा रास्ता फिसलन भरा और खतरनाक हो जाता है, जिससे यह समुदाय स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से और भी कट जाता है।
'यहां सड़क कोई विलासिता की चीज नहीं बल्कि जीवन-रेखा'
सालों से ग्रामीणों ने प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकारियों को अनगिनत ज्ञापन सौंपे हैं, फिर भी कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। यह अनदेखी इसलिए और भी ज्यादा साफ तौर पर दिखती है, क्योंकि ये लोग सोलन के शहरी इलाके के काफी करीब है। वहां रहने वाले एक बुज़ुर्ग ने कहा, 'अगर जिला मुख्यालय के इतने पास की बस्ती को ही नजरअंदाज कर दिया जाए तो दूर-दराज के इलाकों की हालत का अंदाजा ही लगाया जा सकता है। यहां सड़क कोई विलासिता की चीज नहीं बल्कि जीवन-रेखा है।' राज्य के विकास के दावों में अवसंरचना पर खर्च का जिक्र प्रमुखता से होता है लेकिन ‘आंजी' प्रशासनिक उदासीनता का एक जीता-जागता सबूत है। यहां के निवासी यह सवाल पूछने पर मजबूर हैं कि सड़क सुविधा मिलने से पहले और कितनी पीढ़ियों को अपने बीमारों को पैदल ही ले जाना पड़ेगा?
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