हिमाचल में चिट्टे पर बड़ी कार्रवाई, 174 बड़े तस्कर अरैस्ट

Edited By Kuldeep, Updated: 25 Jun, 2026 10:11 PM

dharamshala chitta

हिमाचल में नशे के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए 234 पंचायतों को रैड जोन घोषित कर पुलिस का कड़ा पहरा लगा दिया गया है।

धर्मशाला (सुनील): हिमाचल में नशे के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए 234 पंचायतों को रैड जोन घोषित कर पुलिस का कड़ा पहरा लगा दिया गया है। इस अभियान के तहत अब तक 174 बड़े नशा तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है और पीड़ितों को सुधारने पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए सरकार ने एक विशेष एंटी चिट्टा मॉडल तैयार किया है, जिसके तहत नशा तस्करों पर कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ितों के पुनर्वास पर काम किया जा रहा है। वीरवार को धर्मशाला स्थित स्कूल शिक्षा बोर्ड के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस और टीब जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। कार्यक्रम में बताया गया कि प्रदेश में पहली बार पंचायत स्तर पर सर्वे करके नशा करने वालों और तस्करों की मैपिंग की गई है। इसके तहत राज्य की 234 पंचायतों को सबसे संवेदनशील मानते हुए रैड श्रेणी में रखा गया है, जहां पुलिस की सख्त निगरानी बढ़ा दी गई है।

इस अभियान को सफल बनाने के लिए अब आम जनता की भागीदारी और सामाजिक सहयोग को सबसे जरूरी बताया गया है। इस जागरूकता कार्यक्रम में क्षेत्र के कई प्रमुख नर्सिंग संस्थानों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक, रोल प्ले, पोस्टर मेकिंग, फेस पेंटिंग और भाषण प्रतियोगिताओं के जरिए टी.बी. के लक्षणों, समय पर इलाज और नशे के दुष्प्रभावों पर बेहद प्रभावशाली संदेश दिए। बेहतर प्रदर्शन करने वाले होनहार छात्रों और नोडल अधिकारियों को मंच पर सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा बोर्ड के सचिव विशाल शर्मा, जिला क्षयरोग उन्मूलन अधिकारी डा. आरके सूद और गुंजन संस्था के निदेशक विजय कुमार सहित कई गण्यमान्य लोग उपस्थित रहे।

तस्करों पर पिट-एनडीपीएस के तहत एक्शन
अभियान के तहत प्रदेश में पिट-एनडीपीएस एक्ट को कड़ाई से लागू किया गया है, जिसके तहत अब तक 174 बड़े नशा तस्करों व अपराधियों को हिरासत में लिया जा चुका है। ऐसी कड़ी कार्रवाई करने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बन गया है। इसके साथ ही नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं को मुख्य धारा में वापस लाने के लिए राज्य में नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के मानकीकरण की योजना अंतिम चरण में है। अब लोग सामाजिक डर से बाहर निकलकर खुद टोल-फ्री नंबर 112 पर कॉल करके अपने बच्चों को नशे से बचाने के लिए मदद मांग रहे हैं।

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