Himachal: सरकार ने जारी किए निर्देश, सरकारी भूमि पर मिला अवैध कब्जा तो नहीं लड़ पाएंगे पंचायत चुनाव

Edited By Vijay, Updated: 08 Apr, 2026 07:43 PM

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हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में सरकारी भूमि, शामलात भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले व्यक्ति और उनके परिवार के सदस्य पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, साथ ही चिट्टा व हैराेइन तस्करी में चार्जशीटेड आरोपी पर भी चुनाव लड़ने पर...

शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में सरकारी भूमि, शामलात भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले व्यक्ति और उनके परिवार के सदस्य पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, साथ ही चिट्टा व हैराेइन तस्करी में चार्जशीटेड आरोपी पर भी चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध रहेगा। इस निर्णय का उद्देश्य पंचायतों में स्वच्छ, ईमानदार और निष्पक्ष छवि वाले प्रतिनिधियों का चयन सुनिश्चित करना है। राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

सरकार के निर्देशों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ सरकारी या सामुदायिक भूमि पर अवैध कब्जे की मिसल (राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज मामला) बनी हुई है तो वह व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाएगा। इतना ही नहीं, उसके परिवार का कोई सदस्य भी चुनावी मैदान में नहीं उतर सकेगा। आयोग का मानना है कि इस कदम से भूमि अतिक्रमण जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त लोगों को सार्वजनिक प्रतिनिधित्व से दूर रखा जा सकेगा। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में शामलात भूमि, जिसे जुमला मुश्तरका मालकान भूमि भी कहा जाता है, सामुदायिक उपयोग के लिए होती है। इस भूमि पर अवैध कब्जे के मामलों को लंबे समय से गंभीर समस्या माना जाता रहा है। इससे पंचायतों में अवैध कब्जों को बढ़ावा नहीं मिलेगा।

इसके अलावा, चुनाव प्रक्रिया को स्वच्छ और अपराधमुक्त बनाने के लिए आयोग ने नशा तस्करी से जुड़े मामलों पर भी सख्ती दिखाई है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ चिट्टा या हैरोइन जैसे मादक पदार्थों के मामलों में अदालत द्वारा चार्जशीट फ्रेम हो चुकी है तो वह भी पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होगा। इस प्रावधान का मकसद पंचायत स्तर पर अपराध और नशे के प्रभाव को समाप्त करना है।

विधानसभा में बिल पास, राज्यपाल की मुहर का इंतजार
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में चिट्टा/हैरोइन तस्करी में चार्जशीट हुए व्यक्ति को पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव लड़ने से रोकने को लेकर हाल ही में हुए बजट सत्र में बिल पारित हुआ है। अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह लागू हो जाएगा तथा आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में लागू हो जाएगा।

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