Edited By Vijay, Updated: 01 Jun, 2026 03:40 PM

चम्बा जिले में भाजपा के हाथों से जिला परिषद की सत्ता छिन गई है। कांग्रेस ने जोरदार वापसी की और 5 साल बाद दोबारा सत्तासीन होती नजर आ रही है।
चम्बा (काकू चौहान): चम्बा जिले में भाजपा के हाथों से जिला परिषद की सत्ता छिन गई है। कांग्रेस ने जोरदार वापसी की और 5 साल बाद दोबारा सत्तासीन होती नजर आ रही है। जिप चुनावों में कांग्रेस ने 10 सीटों पर कब्जा कर लिया है। भाजपा को महज 5 ही सीटें हाथ लगी हैं जबकि 3 प्रत्याशी निर्दलीय जीते हैं। इसमें 2 भाजपा की विचारधारा से संबंधित हैं, लेकिन चुनावों में आजाद उम्मीदवार के तौर पर उतरे थे और भाजपा व कांग्रेस के उम्मीदवारों को पटकनी देते हुए शानदार जीत दर्ज की है। कांग्रेस ने विरोधी दलों को पछाड़ते हुए बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, ऐसे में कांग्रेस के जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बनना लगभग तय है।
जिला चम्बा में जिला परिषद की कुल 18 सीटें हैं। इसमें सरोल, चकलू, खनी, सनवाल, चांजू, करवाल, बयाणा, किहार, नैनीखड्ड और मोतला वार्ड से कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार जीते हैं। इसके अलावा भरमौर, करयास, करियां, बनेट व कथेट वार्ड से भाजपा के घोषित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। वहीं बख्तपुर, जियूंता और गैहरा वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं। निर्दलीयों पर भी भाजपा अपना दावा कर रही है। इसमें बख्तपुर वार्ड से विजेता इंदिरा कपूर को गत विधानसभा चुनावों में भाजपा ने चम्बा सदर से टिकट दिया था। हालांकि बाद में टिकट वापस ले लिया था। इसके अलावा जियूंता वार्ड से मीनाक्षी कपूर व गैहरा वार्ड से निर्वाचित सुनील शर्मा का फिल्हाल किसी को समर्थन नहीं है, लेकिन भाजपा उन पर अपना दावा जता रही है। भाजपा ने चुनावों में 16 वार्डों पर प्रत्याशियों की अधिकारिक घोषणा की थी। इसमें 13 वार्ड में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों का हार का सामना करना पड़ा है।
चुनाव परिणाम के हिसाब से कांग्रेस भाजपा से कहीं आगे है। इसके बावजूद निर्दलीयों के समर्थन के बाद ही कुल सीटों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। उधर, तीन निर्दलीयों को अगर भाजपा अपने खेमे में शामिल करने के कामयाब हो जाती है तो भी 8 ही सीटें होंगी और बहुमत के आंकड़े को नहीं छू पाएगी। ऐसे में कांग्रेस के जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद बनना तय है। गत चुनावों में जिला परिषद की सत्ता भाजपा के हाथ में थी। भाजपा ने जहां 10 से अधिक सीटें जीती थीं, वहीं कांग्रेस 5 ही सीटों पर सिमट गई थी और 1 माकपा तथा 2 निर्दलीय उम्मीदवार निर्वाचित हुए थे। इस बार ऐसा ही भाजपा के साथ हुआ है।
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